मंत्री के अनुसार, टीआर-1 और टीआर-2 के तहत बहाल शिक्षकों के लिए ट्रांसफर का विकल्प पहले से ही उपलब्ध है। वहीं टीआर-3 के अंतर्गत बहाल शिक्षकों का ट्रांसफर निर्धारित समयसीमा पूरी होने के बाद शुरू किया जाएगा। यह बयान शिक्षकों के लिए राहत की खबर माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह उम्मीद बढ़ गई है कि बंद किया गया म्युचुअल ट्रांसफर पोर्टल दोबारा खोला जा सकता है।
विपक्षी सदस्यों ने विधानसभा में कहा कि शिक्षकों के स्थानांतरण में पारदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण बनाए रखना आवश्यक है। उनका तर्क है कि शिक्षक गांव और कस्बों में बच्चों को पढ़ाकर शिक्षा की रीढ़ हैं। यदि शिक्षक मानसिक और पारिवारिक दबाव में रहेंगे तो शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। इसलिए उन्हें मनचाही जगह पर तबादला देने की सुविधा सरकार की जिम्मेदारी बनती है।
टीआर-3 के शिक्षकों की कठिनाइयाँ
माले विधायक संदीप सौरव ने सवाल उठाते हुए बताया कि टीआर-3 के तहत बहाल कई शिक्षक अपने गृह जिले से 300 से 500 किलोमीटर दूर तैनात हैं। इनमें बड़ी संख्या महिला शिक्षक भी शामिल हैं, जो पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण इतनी दूरी पर सेवाएं देना मुश्किल पाती हैं। उन्होंने इसे प्रशासनिक असंवेदनशीलता बताया और सरकार से आग्रह किया कि परस्पर स्थानांतरण पोर्टल को पुनः चालू किया जाए ताकि शिक्षक आपसी सहमति से अपने तबादले बदल सकें।
नीति में संभावित संशोधन
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने यह संकेत दिया कि वर्तमान ट्रांसफर नीति में सुधार और संशोधन संभव है। इससे न केवल शिक्षक अपनी सुविधानुसार स्थानांतरण कर पाएंगे बल्कि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और संतुलन भी बनाए रखा जा सकेगा।
यदि सरकार ट्रांसफर नीति को संवेदनशील और लचीला बनाए, तो इससे शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा और शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। बिहार में शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर यह मुद्दा अब विधानसभा के ध्यान में है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही शिक्षक नीति में आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

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