दरअसल, महंगाई भत्ता किसी अनुमान से नहीं, बल्कि एक तय फॉर्मूले के अनुसार तय होता है। Labour Bureau द्वारा हर महीने जारी किए जाने वाले CPI-IW आंकड़े 7वें वेतन आयोग के तहत DA तय करने का आधार हैं। दिसंबर 2025 में CPI-IW 148.2 अंक पर स्थिर रहा। नवंबर तक DA 59.94 प्रतिशत था। दिसंबर का आंकड़ा आने के बाद यह 60.35 प्रतिशत तक पहुँच गया। सरकार DA को हमेशा निकटतम पूर्णांक पर लागू करती है, इसलिए अब इसे 60 प्रतिशत फाइनल माना जा रहा है।
पिछले छह महीनों में DA का रुझान इस प्रकार रहा:
जुलाई 2025: CPI-IW 146.5 → DA 58.52%
अगस्त 2025: CPI-IW 147.1 → DA 58.94%
सितंबर 2025: CPI-IW 147.3 → DA 59.31%
अक्टूबर 2025: CPI-IW 147.7 → DA 59.60%
नवंबर 2025: CPI-IW 148.2 → DA 59.94%
दिसंबर 2025: CPI-IW 148.2 → DA 60.35%
सालाना महंगाई दर दिसंबर 2025 में 3.13 प्रतिशत रही, जो पिछले साल के मुकाबले (3.53%) थोड़ी कम है।
लागू तारीख और ऐलान
DA हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई से प्रभावी होता है। लेकिन CPI-IW के अंतिम आंकड़े आने के बाद ही सरकार कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर औपचारिक ऐलान करती है। इस बार DA 1 जनवरी 2026 से लागू माना जाएगा, जबकि सरकारी ऐलान मार्च 2026 में होगा। इसका मतलब है कि जनवरी और फरवरी के लिए भी एरियर मिलेगा।
कर्मचारियों और पेंशनर्स पर असर
यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹50,000 है, तो: 58% DA → ₹29,000, 60% DA → ₹30,000, हर महीने ₹1,000 अधिक लाभ। पेंशनर्स के लिए: ₹30,000 बेसिक पेंशन पर DA बढ़ोतरी से ₹600-₹700 प्रति माह अतिरिक्त मिलेगा।
इस बार का DA क्यों अहम है?
60 प्रतिशत DA सिर्फ एक सामान्य बढ़ोतरी नहीं है। यह 7वें वेतन आयोग के तहत एक रणनीतिक स्तर माना जाता है। पिछली बार 50 प्रतिशत पार होने पर HRA संरचना में बदलाव हुआ था। 60 प्रतिशत पार होने के बाद भविष्य में सैलरी रीसेट की चर्चाएँ तेज हो सकती हैं।

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