वित्त मंत्री ने बताया कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ शिक्षा और परिवहन से जुड़ी अहम परियोजनाओं के लिए भी भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 210 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है, वहीं सीतामढ़ी-शिवहर नई रेल लाइन परियोजना के लिए लगभग 400 एकड़ जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में है। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं के लिए भी जमीन उपलब्ध कराई जा रही है।
भूमि सुधार व्यवस्था को किया जा रहा सशक्त
सरकार ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को अधिक प्रभावी और जनोपयोगी बनाने पर विशेष जोर दिया है। भूमि विवादों को स्थायी रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से विशेष भूमि सर्वेक्षण कार्य तेजी से चल रहा है। प्रथम चरण में शामिल 20 जिलों में सर्वेक्षण का कार्य अंतिम दौर में पहुंच चुका है, जबकि दूसरे चरण के 18 जिलों में भी सर्वेक्षण शुरू कर दिया गया है।
जन संवाद से मिल रहा त्वरित समाधान
सौ दिनों की कार्य योजना के तहत राज्य के सभी जिलों में भूमि सुधार जन संवाद कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस पहल के जरिए रैयतों और आम नागरिकों की भूमि से जुड़ी समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जा रहा है। इससे लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिली है।
राजस्व रिकॉर्ड का डिजिटाइजेशन तेज
राज्य सरकार ने राजस्व अभिलेखों के डिजिटाइजेशन को भी प्राथमिकता दी है। खतियान, राजस्व मानचित्र और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की स्कैनिंग कर उन्हें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है, जिससे आम जनता को आसानी से जानकारी मिल सके। शेष बचे महत्वपूर्ण दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन इसी वित्तीय वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
विशेष सर्वेक्षण को मिलेगा तकनीकी सहारा
बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्यक्रम के तहत प्राप्त ऑर्थोफोटोग्राफ डाटा के सत्यापन और मानचित्रों में सुधार के लिए राज्यभर में 35 केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए सरकार ने स्वीकृति दे दी है। इन केंद्रों से भूमि रिकॉर्ड को और अधिक सटीक व पारदर्शी बनाया जा सकेगा।

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