यूपी में 'शिक्षकों' को बड़ी खुशखबरी, सरकार लाने जा रही नया नियम!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षकों के लिए एक सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगी है। लंबे समय से छुट्टी के दिनों में जबरन ड्यूटी लगाए जाने को लेकर शिक्षकों में जो असंतोष था, उस पर अब शासन सख्ती दिखाने के मूड में नजर आ रहा है। प्रस्तावित नए नियम लागू होने के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) अब मनमाने ढंग से शिक्षकों को अवकाश के दिन स्कूल बुलाने में सक्षम नहीं होंगे।

दरअसल, पहले माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन कई जिलों में इनका पालन गंभीरता से नहीं किया गया। नतीजा यह हुआ कि छुट्टियों के बावजूद शिक्षकों को विद्यालय आने के आदेश दिए जाते रहे। अब शासन ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सीधे हस्तक्षेप करने का संकेत दिया है।

ठंड की छुट्टियों से शुरू हुआ विवाद

पिछले कुछ महीनों में प्रदेश में कड़ाके की ठंड के चलते सरकार को स्कूलों में अवकाश घोषित करना पड़ा था। इसके बावजूद कई जिलों में शिक्षकों को स्कूल बुलाया गया। कहीं-कहीं तो पहले छुट्टी घोषित की गई और बाद में अचानक ड्यूटी का आदेश थमा दिया गया। इससे शिक्षक समुदाय में भारी नाराजगी फैल गई।

शासन का सख्त रुख

शिकायतों के बढ़ते दबाव के बाद अब शासन स्तर पर इस पूरे मामले को लेकर ठोस व्यवस्था बनाने की तैयारी है। प्रस्ताव है कि यदि किसी विशेष परिस्थिति में छुट्टी के दिन शिक्षकों की जरूरत पड़ती है, तो इसके लिए पहले संयुक्त शिक्षा निदेशक (JD) से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति आदेश जारी करने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।

शिक्षकों की मांग

शिक्षक संगठनों का कहना है कि वे काम से बचना नहीं चाहते। जरूरत पड़ने पर वे छुट्टी के दिन भी ड्यूटी करने को तैयार हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें प्रतिकर अवकाश (कम्पनसेटरी लीव) मिलना चाहिए। एक दिन की छुट्टी में काम कराने पर एक दिन का अवकाश देना एक व्यावहारिक और न्यायपूर्ण व्यवस्था होगी।

संभावित बदलावों का असर

यदि शासन के ये प्रस्ताव नियम का रूप लेते हैं, तो इससे छुट्टी की अवधारणा वास्तव में लागू हो पाएगी। शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा, कार्य-संस्कृति में पारदर्शिता आएगी और अनावश्यक दबाव की राजनीति पर भी रोक लगेगी। यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में संतुलन और सम्मान दोनों को मजबूत करने वाला साबित हो सकता है।

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