पटना में बनेगा 65 किलोमीटर का एलिवेटेड कॉरिडोर
इस बुलेट ट्रेन परियोजना का एक अहम हिस्सा पटना जिला होगा, जहां लगभग 65 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड ट्रैक प्रस्तावित है। अधिकारियों के मुताबिक ट्रैक निर्माण के लिए 60 से अधिक गांवों को चिन्हित किया गया है, जहां आवश्यकता के अनुसार भूमि अधिग्रहण किया जाएगा। शहरी क्षेत्र में जमीन की कमी और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए ट्रैक को जमीन से ऊपर बनाने की योजना है, ताकि शहर की मौजूदा संरचना पर कम असर पड़े।
फुलवारीशरीफ के पास होगा पटना का मुख्य स्टेशन
पटना में बुलेट ट्रेन का प्रमुख स्टेशन फुलवारीशरीफ में एम्स के नजदीक प्रस्तावित है। इसके अलावा एम्स, फुलवारीशरीफ और पाटलिपुत्र स्टेशन क्षेत्र में एलिवेटेड ट्रैक को लेकर गहन विचार-विमर्श चल रहा है। इससे राजधानी के प्रमुख इलाकों को तेज और आधुनिक रेल कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
विकास के साथ पर्यावरण का भी ख्याल
इस मेगा प्रोजेक्ट में पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। पटना जिले में ट्रैक निर्माण के दौरान लगभग 3,885 पेड़ प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन इन्हें काटने के बजाय दूसरी जगह ट्रांसप्लांट करने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए वन विभाग से आवश्यक अनुमति लेने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
138 हेक्टेयर जमीन की होगी जरूरत
पूरे पटना जिले में इस परियोजना के लिए करीब 138 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही बक्सर, भोजपुर, मोकामा, क्यूल, जमालपुर और सुल्तानगंज जैसे इलाकों में भी ट्रैक के लिए गांवों का चिन्हांकन किया जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि यह परियोजना बिहार के बड़े भूभाग को आधुनिक रेल नेटवर्क से जोड़ेगी।
बिहार में कहां रुकेगी बुलेट ट्रेन?
केंद्र सरकार पहले ही वाराणसी–सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन परियोजना की घोषणा कर चुकी है। इस रूट पर बिहार में पटना और कटिहार को प्रमुख स्टॉपेज के रूप में प्रस्तावित किया गया है। लगभग 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली यह ट्रेन वाराणसी से सिलीगुड़ी की दूरी को सिर्फ 2 घंटे 55 मिनट में पूरा कर सकेगी।
आर्थिक और औद्योगिक रफ्तार
दायह हाई-स्पीड कॉरिडोर केवल समय की बचत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्तर बिहार और सीमांचल क्षेत्रों को देश के बड़े आर्थिक केंद्रों से जोड़ देगा। इससे व्यापार, पर्यटन, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

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