सरकार की बजट और किसानों तक पहुंच
इस साल योजना के लिए ₹63,500 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। विशेष रूप से यह ध्यान रखा गया है कि यह सहायता बिचौलियों के बिना सीधे किसानों के बैंक खातों में (DBT) पहुंचे। सरकार का लक्ष्य है कि करीब 9.5 करोड़ किसान इस योजना से लाभान्वित हों। कृषि मंत्रालय का मानना है कि यह आर्थिक मदद सिर्फ आय बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि किसानों की खेती की लागत निकालने और उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने में भी मदद करेगी।
शिकायत निवारण और पारदर्शिता
सरकार ने योजना की पारदर्शिता और शिकायत निवारण तंत्र को और मजबूत किया है। योजना का उद्देश्य है कि मिलने वाली 95% शिकायतों का तुरंत समाधान किया जाए, ताकि किसान को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
खेती के जरूरी सामान पर खर्च
विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग 75% किसान इस राशि का इस्तेमाल उच्च गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक और आधुनिक खेती के उपकरण खरीदने में करेंगे। इससे न केवल किसानों का आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि पैदावार में भी सुधार आएगा।
सरकार का क्या है संदेश?
केंद्र सरकार की योजना स्पष्ट करती है कि किसान देश की अर्थव्यवस्था का मूल स्तंभ हैं। आधुनिक खेती और वित्तीय सुरक्षा के साथ ही यह पहल किसानों को खेती के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी देती है।

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