शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में हुई अहम बैठक
राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल और पश्चिम बंगाल प्रभारी मंगल पांडेय के नेतृत्व में हुई इस अहम बैठक में चुनावी रोडमैप को अंतिम रूप दिया गया। बैठक में संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया गया और साफ किया गया कि जीत की असली लड़ाई बूथ पर लड़ी जाएगी।
बूथ से लेकर विधानसभा तक जिम्मेदारी
बीजेपी की रणनीति के तहत हर बूथ पर 10 से 11 सदस्यों की समिति बनाई गई है। इन समितियों के संचालन की जिम्मेदारी बूथ अध्यक्ष और बूथ प्रभारी को सौंपी गई है। इसके ऊपर शक्ति केंद्र मॉडल लागू किया गया है, जहां एक शक्ति केंद्र पूरे पंचायत क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालेगा। शक्ति केंद्र प्रमुख और प्रभारी सीधे तौर पर विधानसभा प्रभारी को रिपोर्ट करेंगे। इस तरह संगठन की पूरी चेन बूथ से लेकर विधानसभा स्तर तक तय कर दी गई है।
उत्तर पश्चिम बंगाल पर विशेष फोकस
बिहार से भेजे गए संगठन पदाधिकारियों को खासतौर पर उत्तर पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आसनसोल, दुर्गापुर और सिलीगुड़ी जैसे इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां प्रवासी बिहारी मतदाताओं की संख्या प्रभावशाली मानी जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर बंगाल की 31 विधानसभा सीटें बीजेपी के खास निशाने पर हैं। कुल मिलाकर पार्टी का लक्ष्य राज्य की 70 से 80 प्रतिशत सीटों पर मजबूत मुकाबला खड़ा करना है।
बीजेपी ने चुनावी मुद्दे भी किये तय
पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए बीजेपी ने अपने मुद्दे भी लगभग तय कर लिए हैं। पार्टी का फोकस विकास, अपराध मुक्त राज्य, कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार और अवैध घुसपैठ जैसे विषयों पर रहेगा। इन मुद्दों को बूथ स्तर तक पहुंचाने की रणनीति बनाई गई है।

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