नई नीति में तबादले की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की तैयारी है। इसके तहत शिक्षकों को अपनी पसंद के स्कूलों के 30 विकल्प देने का मौका मिलेगा। इसके बाद उपलब्ध पद और नियमों के आधार पर शिक्षकों की नई तैनाती की जाएगी।
पहली बार मेरिट को मिलेगा महत्व
नई ट्रांसफर नीति की खास बात यह है कि इसमें मेरिट को भी आधार बनाया जाएगा। अगर किसी स्कूल में तय संख्या से ज्यादा शिक्षक पदस्थापित हैं तो प्राथमिकता तय करने में योग्यता और मेरिट को ध्यान में रखा जा सकता है। इसके अलावा जिन शिक्षकों की सेवा अवधि ज्यादा है, उन्हें भी तबादले में प्राथमिकता मिलने की संभावना है।
बीमार शिक्षकों को मिलेगी राहत
नीति में गंभीर रूप से बीमार शिक्षकों के लिए भी विशेष प्रावधान रखा गया है। ऐसे शिक्षकों को उनकी परेशानी को देखते हुए घर के नजदीक तैनाती का अवसर दिया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य है कि शिक्षक तनावमुक्त होकर अपनी जिम्मेदारी निभाएं और स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बेहतर हो।
जुलाई तक पूरी हो सकती है प्रक्रिया
सरकार की योजना है कि नई नीति लागू होने के बाद जुलाई महीने में ही शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए, ताकि नए शैक्षणिक सत्र में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। शिक्षा विभाग ने पहले ही स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत और विषयवार पदों की संख्या तय करने का काम शुरू कर दिया है। अब इसी व्यवस्था के आधार पर तबादलों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
स्कूलों में शिक्षकों की संख्या होगी संतुलित
नई व्यवस्था के पीछे सरकार का मकसद यह भी है कि किसी स्कूल में जरूरत से ज्यादा शिक्षक न हों और किसी जगह शिक्षकों की कमी न रहे। बच्चों की संख्या और विषयों की जरूरत के हिसाब से शिक्षकों का बेहतर प्रबंधन किया जाएगा। नई नीति लागू होने के बाद शिक्षकों को अपनी पसंद की जगह पाने का मौका मिलेगा, वहीं सरकार को स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
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