बिहार में शिक्षकों की नौकरी पर संकट के बादल, जांच की प्रक्रिया शुरू

पटना। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE) के जरिए नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। राज्य में अब नियुक्त शिक्षकों के दस्तावेजों की व्यापक जांच शुरू कर दी गई है। शिक्षा विभाग और निगरानी विभाग की ओर से यह जांच आरक्षण और प्रमाणपत्रों की सत्यता को लेकर की जा रही है।

किन शिक्षकों पर रहेगी नजर?

जांच में खास तौर पर उन शिक्षकों के रिकॉर्ड देखे जाएंगे, जिन्होंने बिहार के बाहर के निवासी होने के बावजूद आरक्षित श्रेणी का लाभ लेकर नियुक्ति हासिल की है। इसमें पिछड़ा वर्ग (BC), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC), अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), महिला आरक्षण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) जैसी श्रेणियां शामिल हैं।

इन दस्तावेजों की होगी जांच

नियुक्त शिक्षकों के जरूरी प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जाएगा। इनमें मुख्य रूप से: आवासीय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, क्रीमीलेयर प्रमाणपत्र, EWS प्रमाणपत्र की जांच की जाएगी। सभी जिलों से संबंधित शिक्षकों की जानकारी और दस्तावेज मांगे गए हैं।

स्कूलों से मांगी गई शिक्षकों की सूची

निगरानी विभाग ने जिला स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि दूसरे राज्यों से आने वाले नियुक्त शिक्षकों की पूरी सूची उपलब्ध कराई जाए। साथ ही उनके प्रमाणपत्रों की जांच रिपोर्ट भी भेजने को कहा गया है। समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

फर्जी दस्तावेज मिलने पर होगी कार्रवाई

अगर जांच में किसी शिक्षक के प्रमाणपत्र गलत पाए जाते हैं या आरक्षण नियमों का गलत तरीके से लाभ लेने की पुष्टि होती है, तो उनकी नियुक्ति पर कार्रवाई हो सकती है। ऐसे मामलों में नौकरी समाप्त करने के साथ कानूनी कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।

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