बिहार में जमीन रजिस्ट्री पर नया अपडेट, सरकार ने नए नियम किये लागू

पटना। बिहार में जमीन खरीदने और बेचने वालों के लिए रजिस्ट्री प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने भूमि निबंधन व्यवस्था को अपडेट करते हुए सरकारी जमीन दर, शुल्क और ऑनलाइन प्रक्रिया में कई नए नियम लागू किए हैं। नई व्यवस्था का मकसद जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाना और गलत तरीके से होने वाली रजिस्ट्री पर रोक लगाना है।

जमीन की सरकारी कीमतों में हुआ संशोधन

नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग क्षेत्रों में जमीन के न्यूनतम मूल्य को दोबारा निर्धारित किया गया है। शहरी क्षेत्रों में जमीन के सरकारी मूल्य में करीब 2 गुना तक वृद्धि की गई है। जबकि ग्रामीण इलाकों में जमीन की सरकारी दर में लगभग 1.6 गुना तक बढ़ोतरी की गई है। अब जमीन की रजिस्ट्री के दौरान स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क की गणना इसी नए बढ़े हुए सरकारी मूल्य के आधार पर होगी।

रजिस्ट्री शुल्क की नई व्यवस्था

जमीन या संपत्ति के निबंधन के लिए सरकार ने स्टांप शुल्क की नई दरें लागू की हैं। सामान्य खरीद-बिक्री के मामलों में निर्धारित दर के अनुसार शुल्क देना होगा। वहीं कुछ विशेष परिस्थितियों में, जैसे पुरुष के नाम से महिला के नाम संपत्ति हस्तांतरण करने पर शुल्क में राहत दी गई है। दान-पत्र समेत अन्य संपत्ति हस्तांतरण मामलों में भी नई दरों के अनुसार शुल्क लिया जाएगा।

10 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

नई व्यवस्था में जमीन से जुड़े आवेदन की जांच के लिए समय सीमा तय की गई है। संबंधित अधिकारी को तय अवधि के अंदर जमीन की स्थिति की जांच कर रिपोर्ट देनी होगी। अगर जांच के दौरान कोई समस्या सामने नहीं आती है तो आवेदन आगे की प्रक्रिया के लिए भेज दिया जाएगा। इसकी जानकारी आवेदक को मोबाइल संदेश के जरिए भी मिल सकेगी।

अब ऑनलाइन जांच के बाद होगी रजिस्ट्री

जमीन रजिस्ट्री प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। अब रजिस्ट्री से पहले जमीन से जुड़ी जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज करनी होगी। इसमें जमीन का स्थान, खाता, खेसरा, जमाबंदी और अन्य जरूरी विवरण शामिल होंगे। आवेदन जमा होने के बाद संबंधित अधिकारी इसकी जांच करेंगे।

नई व्यवस्था से लोगों को मिलेगा क्या फायदा?

नई व्यवस्था लागू होने से जमीन की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। सरकारी मूल्य और वास्तविक बाजार मूल्य के बीच अंतर कम होने से गलत मूल्य दिखाकर होने वाले लेन-देन पर रोक लग सकती है। इसके अलावा जमीन की सरकारी कीमत बढ़ने से भविष्य में भूमि अधिग्रहण के दौरान मिलने वाले मुआवजे पर भी असर पड़ सकता है। बैंक से लोन लेने वालों को भी जमीन के बेहतर मूल्यांकन का फायदा मिल सकता है।

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