नई व्यवस्था में बिहार सरकार के आरक्षण नियमों का भी पूरी तरह पालन करना होगा। नियुक्ति प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही सामने आने पर संबंधित कुलपतियों पर कार्रवाई की जा सकती है। इसके लिए राज्यपाल सचिवालय ने विश्वविद्यालयों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
आरोप वाले उम्मीदवारों को नहीं मिलेगा मौका
नए नियमों के अनुसार यदि किसी अभ्यर्थी पर गंभीर आरोप या कोई विवाद जुड़ा हुआ है तो उसे प्राचार्य पद के लिए नियुक्त नहीं किया जाएगा। सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह व्यवस्था इसलिए की है ताकि कॉलेजों में जिम्मेदार और योग्य नेतृत्व की नियुक्ति हो सके।
पांच साल का होगा कार्यकाल
प्रधानाचार्य पद पर नियुक्ति की अवधि पांच साल की होगी। हालांकि, इस दौरान यदि किसी प्राचार्य पर गंभीर आरोप साबित होते हैं तो उन्हें कार्यकाल पूरा होने से पहले भी पद से हटाया जा सकता है। वहीं, अच्छा प्रदर्शन करने वाले प्राचार्यों को पांच साल का अतिरिक्त कार्यकाल दिया जा सकता है, जिसे सेवा विस्तार के रूप में दर्ज किया जाएगा।
चयन प्रक्रिया में साक्षात्कार
प्राचार्य पद के चयन के लिए साक्षात्कार को भी महत्वपूर्ण बनाया गया है। उम्मीदवारों के इंटरव्यू के लिए 20 अंक निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा चयन विश्वविद्यालय की तीन सदस्यीय समिति द्वारा किया जाएगा, जो योग्य उम्मीदवार का चयन करेगी।
अधिकतम उम्र सीमा 60 वर्ष
नए नियमों के तहत प्राचार्य पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की अधिकतम उम्र सीमा 60 वर्ष रखी गई है। इससे पहले चयन प्रक्रिया में अलग-अलग स्तरों पर नियमों को लेकर असमंजस की स्थिति रहती थी, जिसे अब स्पष्ट करने की कोशिश की गई है।

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