किन मछलियों के पालन को मिलेगा बढ़ावा?
इस योजना में कई तरह की मत्स्य प्रजातियों को शामिल किया गया है। लाभार्थी अपनी सुविधा के अनुसार इनका पालन कर सकते हैं। माइनर कॉर्प मछली पालन, कैट फिश पालन, झींगा पालन, मोती पालन। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के तालाबों और जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो और मछली उत्पादन बढ़े।
कितना मिलेगा अनुदान?
योजना के तहत सभी वर्गों के पात्र लोगों को इकाई लागत का 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। बाकी खर्च लाभार्थी को खुद या बैंक ऋण के माध्यम से पूरा करना होगा। अलग-अलग पालन के लिए लागत इस प्रकार तय की गई है:
माइनर कॉर्प पालन: लगभग 94 हजार रुपये (0.5 एकड़)
कैट फिश एवं अन्य मछली पालन: करीब 1.35 लाख रुपये (0.5 एकड़)
झींगा पालन: लगभग 1.10 लाख रुपये (0.5 एकड़)
मोती पालन: करीब 2.24 लाख रुपये (0.5 एकड़)
कौन ले सकता है योजना का फायदा?
इस योजना के लिए राज्य के कई लोग आवेदन कर सकते हैं, जिनमें शामिल हैं: मछली पालन करने वाले किसान, निजी या पट्टे पर तालाब रखने वाले लोग, स्वयं सहायता समूह, किसान समूह, मत्स्य पालन से जुड़े उद्यमी। योजना का लाभ कम से कम 0.25 एकड़ और अधिकतम 1 एकड़ क्षेत्र तक लिया जा सकता है।
आवेदन की प्रक्रिया क्या है?
जो लोग इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, वे बिहार मत्स्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2026 तय की गई है। इच्छुक लोगों को समय से पहले आवेदन कर योजना का लाभ लेने की सलाह दी गई है।
किसानों के लिए रोजगार का नया अवसर
सरकार की इस पहल से गांवों में मछली पालन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कम जमीन और सीमित संसाधनों वाले किसान भी तालाब के जरिए अतिरिक्त आय का साधन बना सकते हैं। मछली पालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।

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