बिहार में प्रोफेसर बनने का बदला नियम, अब NET और PhD के बाद भी होगी नई परीक्षा

पटना। बिहार में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का तरीका बदल सकता है। नई भर्ती व्यवस्था में अब अभ्यर्थियों की सिर्फ डिग्री और शैक्षणिक योग्यता नहीं देखी जाएगी, बल्कि उनकी कक्षा में पढ़ाने की क्षमता को भी परखा जाएगा।

राज्य में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति के लिए तैयार किए गए नए ड्राफ्ट में चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो उम्मीदवारों को एक नई परीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा।

लिखित परीक्षा होगी चयन का मुख्य आधार

नई व्यवस्था में असिस्टेंट प्रोफेसर चयन के लिए लिखित परीक्षा को अहम भूमिका दी गई है। प्रस्ताव के मुताबिक कुल 200 अंकों की चयन प्रक्रिया होगी, जिसमें लिखित परीक्षा और इंटरव्यू दोनों शामिल होंगे। लिखित परीक्षा में अभ्यर्थियों की विषय पर पकड़ को जांचा जाएगा। परीक्षा का स्तर संबंधित विषय के यूजीसी-नेट पैटर्न के करीब रखा जा सकता है।

क्लास लेकर दिखानी होगी पढ़ाने की क्षमता

इस बदलाव का सबसे खास हिस्सा टीचिंग स्किल टेस्ट है। अब उम्मीदवारों को सिर्फ सवालों के जवाब नहीं देने होंगे, बल्कि यह भी साबित करना होगा कि वे छात्रों को किस तरह पढ़ा सकते हैं। इंटरव्यू के दौरान अभ्यर्थी को एक विषय पर पढ़ाने के लिए कहा जा सकता है। इससे चयन बोर्ड उम्मीदवार की समझाने की क्षमता, प्रस्तुति और शिक्षण शैली को परखेगा।

NET और PhD वालों के लिए भी नियम लागू

नई प्रक्रिया में NET या PhD की योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों को भी चयन प्रक्रिया में शामिल होना होगा। कुछ PhD धारकों को NET से छूट मिल सकती है, लेकिन उन्हें लिखित परीक्षा और शिक्षण कौशल जांच से गुजरना पड़ सकता है।

प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया में आएगी पारदर्शिता

प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य ऐसे शिक्षकों का चयन करना है जो विषय ज्ञान के साथ-साथ छात्रों को बेहतर तरीके से पढ़ाने में सक्षम हों। इसके अलावा चयन प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग जैसी व्यवस्था से पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की तैयारी है।

संविदा शिक्षकों के लिए भी नए प्रावधान

जरूरत के हिसाब से होने वाली संविदा नियुक्तियों में भी शिक्षण क्षमता को महत्व देने का प्रस्ताव है। इसमें उम्मीदवारों के अनुभव, शोध कार्य और इंटरव्यू प्रदर्शन को आधार बनाया जा सकता है।

सरकार के फैसले का इंतजार

फिलहाल यह बदलाव प्रस्ताव के स्तर पर है। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही नई भर्ती व्यवस्था लागू होगी। अगर नए नियम लागू होते हैं तो बिहार में उच्च शिक्षा क्षेत्र में शिक्षक नियुक्ति का तरीका पहले से काफी अलग हो जाएगा।

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