प्रशांत किशोर जीतेंगे या हारेंगे? बांकीपुर उपचुनाव के 3 एग्जिट पोल ने चौंकाया

पटना।  बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर उपचुनाव में मतदान समाप्त होने के बाद अब सभी की निगाहें एग्जिट पोल और 3 अगस्त को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। इस बार मुकाबला इसलिए भी खास रहा क्योंकि जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर खुद चुनाव मैदान में हैं। मतदान के बाद सामने आए तीन अलग-अलग एग्जिट पोल ने ऐसा संकेत दिया है, जिसने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।

मतदान के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

बांकीपुर सीट पर गुरुवार को मतदान संपन्न हुआ। चुनाव आयोग के अनुसार कुल करीब 33.57 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान समाप्त होते ही विभिन्न एजेंसियों ने अपने एग्जिट पोल जारी किए, जिनमें अधिकांश ने प्रशांत किशोर को बढ़त मिलने का अनुमान लगाया है। हालांकि यह केवल सर्वेक्षण हैं और अंतिम फैसला मतगणना के बाद ही सामने आएगा।

पहला एग्जिट पोल क्या कहता है?

जनमत पोल्स के सर्वे में जन सुराज उम्मीदवार प्रशांत किशोर को सबसे मजबूत स्थिति में दिखाया गया है। सर्वे के अनुसार उन्हें लगभग 49 से 52 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना जताई गई है। वहीं भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 34 से 36 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया है। वोटों की संख्या के लिहाज से भी प्रशांत किशोर को स्पष्ट बढ़त मिलने की बात कही गई है।

अन्य दो सर्वे भी दे रहे समान संकेत

सिर्फ एक ही नहीं, बल्कि डीवी रिसर्च और पोल पंडित के एग्जिट पोल में भी प्रशांत किशोर की जीत का अनुमान लगाया गया है। इन दोनों एजेंसियों का दावा है कि बांकीपुर में जन सुराज को मजबूत जनसमर्थन मिला है और मुकाबले में उसे बढ़त मिल सकती है। कुछ अनुमानों में उनकी बड़ी जीत की भी संभावना जताई गई है।

भाजपा के लिए क्यों अहम है यह सीट?

बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। इस सीट का राजनीतिक महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि भाजपा नेता नितिन नवीन यहां से लगातार पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं। उनसे पहले उनके पिता भी कई बार इसी सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। पिछले करीब तीन दशकों से इस सीट पर भाजपा का दबदबा बना हुआ है। ऐसे में यदि एग्जिट पोल के अनुमान सही साबित होते हैं, तो यह भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा सकता है।

क्या एग्जिट पोल पर भरोसा किया जा सकता है?

चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि एग्जिट पोल मतदान के बाद मतदाताओं से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। कई बार इनके अनुमान वास्तविक नतीजों के करीब रहते हैं, लेकिन कई अवसरों पर परिणाम पूरी तरह अलग भी निकलते हैं। इसलिए इन्हें अंतिम नतीजा नहीं माना जा सकता।

बांकीपुर उपचुनाव का वास्तविक फैसला 3 अगस्त को मतगणना के बाद सामने आएगा। तभी यह स्पष्ट होगा कि क्या प्रशांत किशोर पहली बार विधानसभा पहुंचेंगे या भाजपा अपने लंबे समय से कायम इस राजनीतिक किले को बचाने में सफल रहेगी।

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