इंक्रीमेंट बढ़ाने की मांग पर जोर
वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों को हर वर्ष 3 प्रतिशत की वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) मिलती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत के अनुरूप नहीं है। उनका तर्क है कि यदि वार्षिक इंक्रीमेंट 5 या 6 प्रतिशत किया जाता है, तो कर्मचारियों की आय में लंबे समय तक अधिक प्रभावी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
कई संगठनों का यह भी सुझाव है कि जब महंगाई भत्ता (DA) एक निश्चित स्तर तक पहुंच जाए, तो उसे मूल वेतन में समाहित करने की व्यवस्था पर भी विचार किया जाए। उनका मानना है कि इससे वेतन संरचना अधिक संतुलित और व्यावहारिक बन सकती है।
फिटमेंट फैक्टर और वेतन पर संभावित असर
वेतन आयोग की सिफारिशों में फिटमेंट फैक्टर सबसे अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि इसी के आधार पर नए वेतनमान तय किए जाते हैं। विभिन्न स्तरों पर इस बात को लेकर चर्चा है कि यदि नया फिटमेंट फैक्टर कर्मचारियों की अपेक्षाओं के अनुरूप तय होता है और साथ ही वार्षिक इंक्रीमेंट की दर भी बढ़ाई जाती है, तो आने वाले वर्षों में कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है।
कुछ वित्तीय विश्लेषणों में यह अनुमान भी जताया गया है कि यदि फिटमेंट फैक्टर अधिक रखा गया और इंक्रीमेंट की दर 6 प्रतिशत तक पहुंची, तो लंबे समय में कर्मचारियों को लाखों रुपये का अतिरिक्त वेतन लाभ मिल सकता है। हालांकि, यह केवल संभावित गणनाएं हैं और अंतिम निर्णय वेतन आयोग की सिफारिशों तथा केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।
अलग-अलग कर्मचारी संगठनों के अलग सुझाव
8वें वेतन आयोग को कई कर्मचारी संगठनों ने अपने-अपने प्रस्ताव भेजे हैं। कुछ प्रमुख सुझाव इस प्रकार हैं.
ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO) ने भी 6 प्रतिशत इंक्रीमेंट की वकालत की है।
नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने वार्षिक इंक्रीमेंट को 6 प्रतिशत करने का सुझाव दिया है।
ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) ने 7 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि का प्रस्ताव रखा है।
इंडियन रेलवे सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने 5 प्रतिशत इंक्रीमेंट का सुझाव दिया है।

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