बिहार में गैर-मजरूआ जमीन को लेकर बड़ी खबर, पढ़ें डिटेल्स

पटना: बिहार में गैर-मजरूआ आम जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ऐसी जमीनों की पहचान कर उन्हें निबंधन प्रणाली में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इस श्रेणी की जमीन की रजिस्ट्री कराना संभव नहीं होगा, क्योंकि सॉफ्टवेयर स्तर पर ही ऐसे मामलों को रोक दिया जाएगा।

सॉफ्टवेयर करेगा रजिस्ट्री पर रोक

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने निबंधन विभाग को निर्देश दिया है कि खतियान और भूमि सर्वेक्षण के आधार पर चिन्हित गैर-मजरूआ आम जमीनों का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल प्रणाली में दर्ज किया जाए। इसके लिए प्रत्येक जिले की ऐसी जमीनों की सूची तैयार कर निबंधन विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी।

क्या है गैर-मजरूआ आम जमीन?

गैर-मजरूआ आम जमीन वह सरकारी भूमि होती है, जिसका उपयोग आम जनता के हित में किया जाता है। इसमें सड़क, स्कूल, तालाब, श्मशान घाट, कब्रिस्तान, खेल मैदान और अन्य सार्वजनिक उपयोग की भूमि शामिल होती है। समय के साथ कई स्थानों पर इन जमीनों पर कब्जे और अवैध खरीद-बिक्री की शिकायतें सामने आती रही हैं, जिसके चलते सरकार अब इन्हें पूरी तरह सुरक्षित करने की दिशा में कदम उठा रही है।

भूमिहीनों को मिलता है लाभ

सरकार समय-समय पर गैर-मजरूआ आम जमीन का उपयोग भूमिहीन परिवारों को आवास उपलब्ध कराने जैसी योजनाओं के लिए करती है। ऐसे मामलों में लाभार्थियों को जमीन निर्धारित शर्तों के साथ दी जाती है और उसकी बिक्री की अनुमति नहीं होती। नई व्यवस्था लागू होने से ऐसी जमीनों के दुरुपयोग और अवैध हस्तांतरण पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

पहले भी सरकार कर चुकी है घोषणा

राज्य सरकार ने इससे पहले भी गैर-मजरूआ आम जमीन की बिक्री रोकने का संकेत दिया था। इसी क्रम में अब विभागीय स्तर पर तकनीकी व्यवस्था तैयार की जा रही है, ताकि अवैध रजिस्ट्री की संभावना पूरी तरह समाप्त की जा सके। साथ ही, यदि नियमों के विपरीत ऐसी जमीन की बिक्री के मामले सामने आते हैं, तो संबंधित कार्रवाई भी की जा सकती है।

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