बिहार के किसानों के लिए खुशखबरी, 5 प्रखंडों में बनेंगे 26 चेकडैम

न्यूज डेस्क: बिहार के अरवल जिले के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। खेती के लिए पानी की कमी से जूझ रहे किसानों को अब बेहतर सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। जिले के सभी पांच प्रखंडों में 26 चेकडैम बनाने की योजना तैयार की गई है। विभागीय प्रक्रिया अंतिम चरण में है और मंजूरी के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

5 प्रखंडों में बनेंगे 26 चेकडैम

योजना के तहत अरवल जिले के पांचों प्रखंडों में कुल 26 चेकडैम बनाए जाएंगे। इनमें सबसे अधिक निर्माण कुर्था प्रखंड में होगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार अरवल प्रखंड में 5, कलेर में 7, कुर्था में 12, करपी में 1 और बंसी प्रखंड में 1 चेकडैम का निर्माण किया जाएगा। इनकी लंबाई आवश्यकता के अनुसार लगभग 9 मीटर से 15 मीटर तक होगी।

एक चेकडैम से कई गांवों को लाभ

प्रत्येक चेकडैम से आसपास के दो से तीन गांवों के किसानों को सिंचाई की सुविधा मिल सकेगी। बरसात के दौरान नालों, आहर और पईन का पानी इन चेकडैमों में संग्रहित किया जाएगा। बाद में स्लुइस गेट के माध्यम से जरूरत के अनुसार पानी खेतों तक पहुंचाया जाएगा। इससे किसानों को फसल के महत्वपूर्ण समय पर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहेगा।

नौ महीने तक रहेगा पानी का भंडारण

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि चेकडैम में वर्ष के लगभग नौ महीने तक पानी सुरक्षित रखा जा सकेगा। इससे केवल सिंचाई ही नहीं, बल्कि जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। लंबे समय तक पानी उपलब्ध रहने से भूजल स्तर में सुधार होने की संभावना है, जिससे गर्मियों में पेयजल संकट की समस्या भी कम हो सकती है।

ऊंचे खेतों तक भी पहुंचेगा सिंचाई का पानी

परियोजना में ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि ऊंचाई वाले खेतों तक भी पानी आसानी से पहुंच सके। इसके अलावा अधिक वर्षा या बाढ़ की स्थिति में चेकडैम को सुरक्षित रखने के लिए फ्लड स्लुइस चैनल का भी निर्माण किया जाएगा, ताकि अतिरिक्त पानी का सुरक्षित निकास हो सके और संरचना को नुकसान न पहुंचे।

खेती की लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ने की उम्मीद

सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने से किसानों की मोटर पंप और अन्य वैकल्पिक साधनों पर निर्भरता कम होगी। इससे सिंचाई की लागत घटेगी और समय पर पानी मिलने के कारण फसलों की उत्पादकता बढ़ने की संभावना भी रहेगी। किसान वर्ष में अधिक फसलें लेने की दिशा में भी आगे बढ़ सकेंगे।

0 comments:

Post a Comment