पहले चरण में 29 गांवों में शुरू हुई प्रक्रिया
जिला भू-अर्जन कार्यालय के अनुसार, शंभूगंज, अमरपुर और बांका प्रखंड के 29 गांवों से संबंधित थ्री-ए अधिसूचना प्राप्त हो चुकी है। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने खाता-खेसरा, भूमि क्षेत्रफल और स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड का सत्यापन शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यदि कोई आपत्ति आती है तो उसका निस्तारण किया जाएगा। इसके बाद प्रभावित भूमि मालिकों के लिए मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
शेष गांवों की रिपोर्ट का इंतजार
परियोजना में शामिल फुल्लीडुमर और कटोरिया प्रखंड के 29 राजस्व गांवों की थ्री-ए रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। जिला प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट मिलते ही इन क्षेत्रों में भी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी, ताकि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की देरी न हो।
बांका जिले से ऐसा होगा एक्सप्रेसवे
प्रस्तावित रूट के अनुसार, एक्सप्रेसवे शंभूगंज से बांका जिले में प्रवेश करेगा और वहां से फुल्लीडुमर, अमरपुर, बांका तथा कटोरिया होते हुए झारखंड की सीमा में प्रवेश करेगा। इसके बाद यह मार्ग देवघर के आसपास से गुजरते हुए पश्चिम बंगाल के हल्दिया बंदरगाह तक पहुंचेगा। इस कॉरिडोर के बनने से बिहार के कई क्षेत्रों को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क और प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा।
बिहार में होगा सबसे बड़ा हिस्सा
करीब 600 किलोमीटर लंबे रक्सौल-हल्दिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा हिस्सा बिहार में प्रस्तावित है। राज्य में इसकी लंबाई लगभग 406 किलोमीटर होगी, जबकि झारखंड में करीब 90 किलोमीटर और पश्चिम बंगाल में लगभग 90 से 100 किलोमीटर तक यह मार्ग विकसित किया जाएगा।

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