परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों की अब खैर नहीं! सरकार लाई सबसे सख्त कानून

नई दिल्ली। देश में सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लोकसभा ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) (Amendment) Bill, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया है। इस संशोधन के बाद पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा में अनियमितताओं से जुड़े मामलों में पहले की तुलना में अधिक कठोर दंड का प्रावधान किया गया है।

सरकार का मानना है कि भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। ऐसे में कानून को और सख्त बनाकर परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने तथा दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।

सजा और जुर्माने में बड़ा इजाफा

संशोधित विधेयक के तहत परीक्षा में पेपर लीक, प्रश्नपत्र से छेड़छाड़ या अन्य संगठित धोखाधड़ी के मामलों में दोषी पाए जाने वालों के लिए न्यूनतम सजा को बढ़ा दिया गया है। अब ऐसे मामलों में दोषियों को कम से कम 5 वर्ष की कैद का सामना करना पड़ सकता है।

आर्थिक दंड को भी काफी बढ़ाया गया है। गंभीर मामलों में अधिकतम जुर्माना ₹5 करोड़ तक लगाया जा सकेगा। वहीं व्यक्तिगत स्तर पर दोषी पाए जाने वाले लोगों के लिए अधिकतम जुर्माने की सीमा बढ़ाकर ₹50 लाख कर दी गई है। सरकार का मानना है कि कठोर आर्थिक दंड ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद करेगा।

एजेंसियां और कंपनियां भी होंगी जवाबदेह

नया संशोधन केवल पेपर लीक गिरोहों तक सीमित नहीं है। परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाएं, परीक्षा केंद्रों का संचालन करने वाली एजेंसियां, तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियां और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी अन्य संस्थाएं भी इसके दायरे में आएंगी।

यदि किसी एजेंसी या कंपनी की भूमिका परीक्षा में गड़बड़ी या धोखाधड़ी में सामने आती है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा संबंधित संस्था को 8 वर्ष तक सार्वजनिक परीक्षाओं के आयोजन से प्रतिबंधित किया जा सकेगा। आवश्यकता पड़ने पर परीक्षा आयोजित करने में हुए खर्च की वसूली भी संबंधित संस्था से की जा सकती है।

परीक्षा प्रणाली में भरोसा बढ़ाने की पहल

पिछले कुछ वर्षों में कई भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल के मामलों ने परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए थे। इससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को मानसिक, आर्थिक और शैक्षणिक नुकसान उठाना पड़ा। ऐसे मामलों को देखते हुए सरकार ने कानून को और अधिक प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है।

कानून बनने के बाद क्या होगा असर?

लोकसभा से पारित होने के बाद विधेयक आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करेगा। कानून लागू होने के बाद जांच एजेंसियों को दोषियों के खिलाफ अधिक सख्ती से कार्रवाई करने का कानूनी आधार मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि कठोर सजा, भारी जुर्माना और संस्थाओं की जवाबदेही तय होने से भविष्य में पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी की घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।

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