केंद्र सरकार ला रही है नया नियम, शॉपिंग करने वालों के लिए खुशखबरी

नई दिल्ली: कपड़ों की खरीदारी के दौरान अलग-अलग ब्रांड की अलग-अलग फिटिंग से परेशान होने वाले ग्राहकों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार देशभर में कपड़ों की साइजिंग को एक समान (स्टैंडर्डाइज्ड) बनाने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद अलग-अलग कंपनियों में S, M और L जैसी साइज का अर्थ लगभग एक जैसा होगा, जिससे खरीदारी करना पहले की तुलना में आसान हो जाएगा।

क्यों महसूस हुई जरूरत?

वर्तमान में अधिकांश कपड़ा कंपनियां अमेरिका और ब्रिटेन के साइज चार्ट का उपयोग करती हैं। लेकिन भारतीय लोगों की शारीरिक बनावट पश्चिमी देशों के लोगों से अलग होने के कारण एक ही साइज अलग-अलग ब्रांड में अलग फिटिंग देता है। अक्सर ऐसा होता है कि किसी कंपनी का मीडियम (M) दूसरे ब्रांड में स्मॉल (S) या लार्ज (L) के बराबर निकलता है। इससे ग्राहकों को सही साइज चुनने में परेशानी होती है, खासकर ऑनलाइन खरीदारी के दौरान।

ऑनलाइन शॉपिंग होगी आसान

सरकार का मानना है कि एक समान साइजिंग व्यवस्था लागू होने के बाद ऑनलाइन खरीदारी करने वाले ग्राहकों को सही साइज चुनने में आसानी होगी। गलत साइज मिलने की वजह से होने वाले रिटर्न और एक्सचेंज की संख्या भी कम हो सकती है। इससे ग्राहकों का समय और खर्च दोनों बचेंगे।

भारतीय शरीर की बनावट के अनुसार तैयार होगा मानक

नए साइजिंग फ्रेमवर्क की तैयारी के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) ने देशभर में व्यापक अध्ययन किया है। इस अध्ययन में 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के 25 हजार से अधिक भारतीय पुरुषों और महिलाओं के शरीर के विभिन्न माप लिए गए। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर भारतीय शरीर की बनावट के अनुरूप साइज मानक तैयार किए जा रहे हैं, ताकि कपड़ों की फिटिंग अधिक सटीक हो सके।

इस व्यवस्था के लिए विशेषज्ञों की टास्क फोर्स कर रही है काम

टेक्सटाइल मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए उद्योग जगत, रिटेल कंपनियों और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करते हुए एक विशेष टास्क फोर्स बनाई है। यह समूह कंधे, छाती, कमर, लंबाई और अन्य जरूरी शारीरिक मापों के लिए राष्ट्रीय मानक तय कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, तकनीकी स्तर का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और अब अंतिम मानकों को तय करने की प्रक्रिया चल रही है।

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