₹5 में मिलेगा पौष्टिक भोजन
नई योजना के तहत बिहार भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि कम आय वाले श्रमिकों को कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलने से उनकी आर्थिक बचत होगी और स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। भोजन की शेष लागत का वहन कल्याण बोर्ड करेगा, जिससे श्रमिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
श्रमिकों को मिलेगा सुरक्षित ठिकाना
सरकार ने ऐसे श्रमिकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए श्रमिक अतिथिशाला योजना तैयार की है, जो काम की तलाश में गांवों से शहरों में आते हैं या दूसरे राज्यों से बिहार लौटते हैं। इन अतिथिशालाओं में श्रमिकों को कुछ दिनों तक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में रहने की सुविधा मिलेगी, ताकि उन्हें शुरुआती दिनों में रहने की समस्या का सामना न करना पड़े।
पटना के नौ स्थानों से होगी शुरुआत
योजना के पहले चरण में राजधानी पटना के नौ प्रमुख क्षेत्रों में श्रमिक अतिथिशालाएं स्थापित की जाएंगी। इनमें पाटलिपुत्र इंडस्ट्रियल एरिया, पाटलिपुत्र स्टेशन, बैरिया जीरोमाइल, आईएसबीटी-कंकड़बाग, दानापुर जंक्शन, सगुना मोड़, बिहटा कॉरिडोर, नौबतपुर और दीदारगंज शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य है कि प्रारंभिक चरण की सफलता के बाद इस सुविधा का विस्तार राज्य के सभी जिलों तक किया जाए।
महिला और पुरुष श्रमिकों के लिए अलग व्यवस्था
अतिथिशालाओं में महिला और पुरुष श्रमिकों के लिए अलग-अलग डॉरमेट्री बनाई जाएंगी। यहां 50 से 100 बेड तक की व्यवस्था होगी, जहां श्रमिक सामान्य परिस्थितियों में 7 से 10 दिनों तक ठहर सकेंगे। यदि किसी विशेष परिस्थिति में अधिक समय तक रुकने की आवश्यकता होगी तो अवधि बढ़ाने का भी प्रावधान रखा जाएगा। अतिथिशालाएं चौबीसों घंटे संचालित होंगी और यहां भोजन व आवास दोनों अनुदानित दरों पर उपलब्ध होंगे।
स्थायी कैंटीन और मोबाइल फूड वैन की भी होगी व्यवस्था
श्रमिकों तक भोजन की सुविधा आसानी से पहुंचाने के लिए पटना के प्रमुख श्रमिक क्षेत्रों में स्थायी कैंटीन के साथ-साथ मोबाइल फूड वैन भी चलाई जाएंगी। योजना के तहत 10 भोजशालाएं स्थापित की जाएंगी। प्रत्येक केंद्र पर प्रतिदिन लगभग 300 श्रमिकों के लिए नाश्ता और 300 श्रमिकों के लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था की जाएगी। इससे उन श्रमिकों को भी लाभ मिलेगा जो निर्माण स्थलों पर लगातार कार्यरत रहते हैं।

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