परिसीमन के बाद ही होंगे पंचायत चुनाव
पंचायती राज विभाग की योजना के अनुसार पहले पंचायतों का परिसीमन पूरा किया जाएगा और उसके बाद ही पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया के कारण चुनाव कार्यक्रम में अधिक देरी होने की संभावना नहीं है। राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही निर्वाचक सूची और निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़ी प्रारंभिक तैयारियां कर चुका है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि पंचायत चुनाव निर्धारित समय के आसपास ही कराए जा सकते हैं।
1994 के बाद पहली बार होगा बड़ा बदलाव
बिहार में पंचायतों का पिछला व्यापक परिसीमन वर्ष 1994 में किया गया था। उस समय 1991 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया गया था। तब बिहार अविभाजित था और झारखंड भी राज्य का हिस्सा था। उस समय लगभग 8.64 करोड़ की आबादी के आधार पर 8,067 ग्राम पंचायतों का गठन किया गया था। बीते तीन दशकों में राज्य की जनसंख्या, प्रशासनिक आवश्यकताओं और ग्रामीण क्षेत्रों की संरचना में काफी बदलाव आया है। इसी कारण लंबे समय बाद परिसीमन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
2011 की जनगणना के आधार पर बनेगा नया ढांचा
इस बार पंचायतों के पुनर्गठन के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाया जाएगा। इसके तहत ग्राम पंचायतों के साथ-साथ वार्ड, पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों की सीमाओं का भी नए सिरे से निर्धारण किया जाएगा। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार पंचायतों की संख्या बढ़कर 12 हजार से अधिक हो सकती है। इसके साथ ही वार्डों, पंचायत समितियों और जिला परिषद क्षेत्रों की संख्या में भी वृद्धि होने की संभावना है, जिससे स्थानीय प्रतिनिधित्व का दायरा और व्यापक होगा।
पंचायतों में बढ़ती आबादी के अनुसार बढ़ेगा प्रतिनिधित्व
2011 की जनगणना के अनुसार बिहार की आबादी बढ़कर 10.41 करोड़ से अधिक हो चुकी थी। जनसंख्या में इस वृद्धि के कारण कई पंचायतों का आकार काफी बड़ा हो गया है, जिससे प्रशासनिक कार्यों और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में चुनौतियां सामने आती रही हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद छोटी और संतुलित पंचायतों के गठन से स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं की निगरानी, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और आम लोगों की भागीदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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