इंटर्नशिप के दौरान कितना मिलता है स्टाइपेंड?
MBBS की पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों को अनिवार्य इंटर्नशिप करनी होती है। इस दौरान उन्हें वेतन नहीं बल्कि स्टाइपेंड दिया जाता है। इसकी राशि संस्थान और राज्य के अनुसार अलग-अलग होती है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आमतौर पर 18,000 से 30,000 रुपये प्रतिमाह तक स्टाइपेंड मिल सकता है।
वहीं, AIIMS, JIPMER जैसे केंद्रीय संस्थानों में यह राशि लगभग 23,000 से 30,000 रुपये तक हो सकती है। जबकि कई निजी या डीम्ड विश्वविद्यालयों में स्टाइपेंड 7,000 से 15,000 रुपये प्रतिमाह के बीच होता है। अलग-अलग राज्यों में भी स्टाइपेंड की राशि में अंतर देखने को मिलता है।
जूनियर रेजिडेंट बनने पर बढ़ती है आय
इंटर्नशिप पूरी होने के बाद यदि डॉक्टर जूनियर रेजिडेंट के रूप में कार्य करते हैं, तो उनकी मासिक आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है। प्रथम वर्ष के जूनियर रेजिडेंट को सामान्यतः 55,000 से 65,000 रुपये प्रतिमाह तक मिल सकते हैं। जबकि दूसरे वर्ष में यह राशि 60,000 से 70,000 रुपये तक पहुंच सकती है।
तीसरे वर्ष में सैलरी 65,000 से 80,000 रुपये प्रतिमाह तक हो सकती है। वहीं AIIMS, PGIMER, JIPMER और NIMHANS जैसे प्रमुख केंद्रीय संस्थानों में भत्तों सहित यह राशि 75,000 से 90,000 रुपये या उससे अधिक भी हो सकती है।
पीजी के बाद बढ़ जाती है कमाई
यदि डॉक्टर MBBS के बाद MD, MS या DNB जैसी स्नातकोत्तर डिग्री पूरी करते हैं, तो वे सीनियर रेजिडेंट के रूप में कार्य कर सकते हैं। इस स्तर पर जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ वेतन भी बेहतर हो जाता है। केंद्रीय सरकारी संस्थानों में सीनियर रेजिडेंट को लगभग 95,000 से 1.20 लाख रुपये प्रतिमाह तक मिल सकते हैं।
राज्य सरकार के मेडिकल कॉलेजों में यह राशि 80,000 से 1 लाख रुपये तक हो सकती है। जबकि निजी अस्पतालों में अनुभव और संस्थान के आधार पर 60,000 से 1 लाख रुपये या इससे अधिक वेतन भी मिल सकता है। मेडिकल क्षेत्र में अनुभव सैलरी में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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