लंग्स कैंसर होने के 5 बड़े संकेत, शरीर में दिखें ये लक्षण तो न करें नजरअंदाज!

हेल्थ डेस्क। फेफड़ों का कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसके लक्षण शुरुआती दौर में सामान्य खांसी या सांस से जुड़ी परेशानी जैसे दिखाई दे सकते हैं। यही वजह है कि कई लोग इन्हें मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, हर खांसी या सांस की तकलीफ कैंसर का संकेत नहीं होती, लेकिन लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बढ़ने लगें तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। आइए जानते हैं फेफड़ों के कैंसर से जुड़े पांच अहम संकेत।

1. लंबे समय तक खांसी रहना

अगर खांसी कई हफ्तों तक बनी रहती है, लगातार बढ़ रही है या पहले से मौजूद खांसी के तरीके में बदलाव आ गया है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर धूम्रपान करने वालों को ऐसे बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। लगातार खांसी के पीछे संक्रमण या दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं, इसलिए सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

2. खांसी के साथ खून आना

खांसते समय बलगम में खून दिखाई देना फेफड़ों से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। इसकी वजह कैंसर के अलावा संक्रमण या अन्य बीमारियां भी हो सकती हैं। फिर भी, खांसी के साथ खून आने पर जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

3. सांस लेने में परेशानी होना

पहले आसानी से किए जाने वाले कामों के दौरान सांस फूलना, लगातार सांस लेने में दिक्कत होना या सीने में घरघराहट महसूस होना भी जांच की वजह हो सकता है। फेफड़ों के कैंसर के अलावा अस्थमा, संक्रमण और हृदय संबंधी समस्याएं भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं। यदि सांस लेने में अचानक या गंभीर परेशानी हो, तो आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

4. सीने में लगातार दर्द रहना

सीने में ऐसा दर्द जो लगातार बना रहे, गहरी सांस लेने, खांसने या हंसने पर बढ़ जाए, उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। फेफड़ों की बीमारी सहित कई स्थितियों में ऐसा हो सकता है। यदि दर्द नया, लगातार या बढ़ता हुआ है, तो डॉक्टर से परामर्श लें। अचानक तेज सीने का दर्द, खासकर सांस फूलने या पसीना आने के साथ, आपातकालीन स्थिति हो सकती है।

5. बिना वजह वजन कम होना और थकान

बिना डाइट या व्यायाम में बदलाव किए वजन तेजी से घटना, लगातार थकान रहना या भूख कम लगना कई गंभीर बीमारियों के संकेत हो सकते हैं। कुछ मामलों में ये फेफड़ों के कैंसर के साथ भी दिखाई देते हैं। यदि ऐसे लक्षण लगातार बने रहें, तो चिकित्सकीय जांच कराना उचित है।

किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए?

धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर का प्रमुख जोखिम कारक है। इसके अलावा दूसरे के धुएं के संपर्क, वायु प्रदूषण, रेडॉन गैस और कुछ कार्यस्थलों पर मौजूद हानिकारक पदार्थों के संपर्क से भी जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, धूम्रपान न करने वाले लोगों को भी फेफड़ों का कैंसर हो सकता है।

समय पर जांच क्यों जरूरी है?

इन पांच लक्षणों का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को कैंसर ही है। बीमारी की पुष्टि के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार शारीरिक जांच, इमेजिंग टेस्ट और अन्य परीक्षण करा सकते हैं। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने से समस्या की पहचान और उचित इलाज की दिशा में समय रहते कदम उठाया जा सकता है।

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