1. हर 5 साल में हो पेंशन रिवीजन
अभी पेंशन संशोधन आम तौर पर वेतन आयोगों के जरिए लंबे अंतराल पर होता है। पेंशनर्स संगठनों की मांग है कि इसे घटाकर हर 5 साल किया जाए, ताकि महंगाई और बढ़ते खर्च के हिसाब से पेंशन में समय-समय पर सुधार हो सके। NC-JCM की बैठक में इस मांग को 8वें वेतन आयोग के सामने रखने की बात सामने आई थी।
2. फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस का मुद्दा
पेंशनर्स के लिए मेडिकल खर्च एक बड़ा मुद्दा है। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने Fixed Medical Allowance (FMA) को बढ़ाकर ₹3,000 प्रति माह करने की मांग रखी है। यानी प्रस्ताव स्वीकार होने पर पात्र पेंशनर्स को मौजूदा राशि की तुलना में ज्यादा मेडिकल सहायता मिल सकती है। हालांकि, यह अभी मांग है।
3. न्यूनतम पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी का प्रस्ताव
पेंशनर्स संगठनों ने न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की भी मांग की है। भारत पेंशनर्स समाज की ओर से ₹45,000 न्यूनतम पेंशन और 3.83 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव रखा गया है। यह संगठन की मांग है, सरकारी तौर पर तय नई न्यूनतम पेंशन नहीं।
4. फैमिली पेंशन के नियमों में बदलाव की मांग
फैमिली पेंशन को लेकर भी बड़ा मुद्दा उठाया गया है। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने मांग की है कि मृत कर्मचारी या पेंशनर की नॉटिशनल पे के 30 प्रतिशत तक सीमित फैमिली पेंशन वाले नियम की समीक्षा की जाए। इसके अलावा परिवार की परिभाषा में कुछ आश्रित सदस्यों को शामिल करने और आश्रितों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा देने की मांग भी सामने आई है।
5. पेंशनर्स की CGHS सुविधा के विस्तार की मांग
पेंशनर्स संगठनों ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी बड़ा प्रस्ताव दिया है। NC-JCM की मांगों में CGHS सुविधाओं का विस्तार और कैशलेस इलाज शामिल है। एक प्रस्ताव में CGHS की पहुंच को मौजूदा करीब 81 शहरों से बढ़ाकर 150 शहरों तक करने की मांग भी सामने आई है।
भारत पेंशनर्स समाज ने इससे आगे बढ़कर ग्रामीण और गैर-CGHS क्षेत्रों में भी CGHS जैसी स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा FMA को ₹5,000 प्रति माह करने का प्रस्ताव रखा है। यानी अलग-अलग पेंशनर संगठनों की मांगों में FMA की राशि अलग है।
8वें वेतन आयोग में क्या होगा?
केंद्र सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस मंजूर किए हैं। आयोग को अपनी सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। सरकार के मुताबिक वेतन आयोग वेतन के साथ रिटायरमेंट बेनिफिट और सेवा शर्तों में बदलाव से जुड़े मुद्दों पर भी विचार करता है।
इसलिए पेंशनर्स के लिए ऊपर बताए गए सभी आंकड़े फिलहाल मांग और प्रस्ताव हैं। ₹45,000 न्यूनतम पेंशन, 3.83 फिटमेंट फैक्टर, ₹3,000 या ₹5,000 FMA और हर पांच साल में पेंशन संशोधन जैसे प्रस्तावों पर अंतिम फैसला आयोग की सिफारिश और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा।
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