करीब एक दशक से लंबित इस प्रोजेक्ट को मंजूरी की दिशा में अब तेजी आने की उम्मीद है। एनओसी मिलने के बाद एनएचएआई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में जुट गया है।
केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी के बाद शुरू होगी टेंडर प्रक्रिया
तैयार किए जा रहे प्रस्ताव को जल्द ही अंतिम वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति के लिए केंद्रीय कैबिनेट के सामने भेजे जाने की संभावना है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद एनएचएआई टेंडर जारी कर निर्माण एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर सकेगा। मौजूदा योजना के अनुसार नए साल में इस फोरलेन का निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
100 किलोमीटर लंबी सड़क पर 3200 करोड़ खर्च
मुजफ्फरपुर से बरौनी के बीच बनने वाली यह सड़क करीब 100 किलोमीटर लंबी होगी। परियोजना पर लगभग 3,200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें सड़क निर्माण के साथ कई पुल-पुलिया, अंडरपास और फ्लाईओवर भी बनाए जाएंगे। इस सड़क के तैयार होने से उत्तर बिहार के महत्वपूर्ण क्षेत्रों के बीच आवागमन आसान होने के साथ यात्रा के समय में भी कमी आने की उम्मीद है।
नए सिरे से जमीन अधिग्रहण की जरूरत नहीं
परियोजना की एक बड़ी राहत यह है कि इसके लिए बड़े पैमाने पर दोबारा भूमि अधिग्रहण नहीं करना पड़ेगा। बताया गया है कि वर्ष 1967-68 में राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के दौरान ही पर्याप्त जमीन अधिग्रहित की जा चुकी थी। अब मुख्य चुनौती सड़क की जमीन से अतिक्रमण हटाने की है।
17 किलोमीटर का रिंग रोड भी बनेगा
मुजफ्फरपुर शहर को ट्रैफिक जाम से राहत देने के लिए इस परियोजना के साथ करीब 17 किलोमीटर लंबा रिंग रोड भी प्रस्तावित है। फोरलेन और रिंग रोड को मिलाकर दोनों परियोजनाओं पर लगभग 5,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें अकेले रिंग रोड की लागत करीब 1,800 करोड़ रुपये बताई गई है।
रिंग रोड बनने के बाद समस्तीपुर और हाजीपुर की तरफ से आने-जाने वाले वाहनों को शहर के अंदर से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे खास तौर पर रामदयालु चौक पर वाहनों का दबाव कम होने और शहर में जाम की समस्या घटने की उम्मीद है।

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