अगर आयोग इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो सोलर पैनल से पैदा होने वाली वह बिजली जो सालभर में इस्तेमाल नहीं हो पाती, उसका लाभ उपभोक्ता को मिल सकेगा। यानी वित्तीय वर्ष खत्म होने के बाद बची हुई बिजली को बेकार जाने के बजाय उपभोक्ता के खाते में समायोजित करने का रास्ता खुल सकता है।
अभी कैसे काम करती है नेट मीटरिंग व्यवस्था?
फिलहाल बिहार में नेट मीटरिंग के तहत घर पर लगा सोलर प्लांट पहले घर की बिजली की जरूरत पूरी करता है। यदि उत्पादन खपत से ज्यादा हो जाता है, तो अतिरिक्त बिजली बिजली ग्रिड में चली जाती है। इस अतिरिक्त बिजली का हिसाब हर महीने के बिजली बिल में किया जाता है। लेकिन मौजूदा व्यवस्था में वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर बची हुई बिजली को अगले साल के खाते में आगे ले जाने की सुविधा नहीं है। नए प्रस्ताव का उद्देश्य इसी व्यवस्था में बदलाव करना है।
सोलर लगाने वालों को मिलेगा प्रोत्साहन
ऊर्जा विभाग का मानना है कि प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से लोग अपनी छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए ज्यादा उत्साहित होंगे। जिन उपभोक्ताओं ने पहले से रूफटॉप सोलर सिस्टम लगा रखा है, उन्हें भी अतिरिक्त बिजली का बेहतर आर्थिक लाभ मिल सकेगा। इससे राज्य में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिल सकती है।
किसानों को भी सौर ऊर्जा से फायदा
सिर्फ घरेलू उपभोक्ता ही नहीं, किसान भी सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। पीएम-कुसुम योजना के तहत लगाए जा रहे सोलर प्लांट से किसान बिजली पैदा कर रहे हैं। इन प्लांटों से उत्पादित बिजली की खरीद ऊर्जा विभाग द्वारा की जा रही है।

0 comments:
Post a Comment