RBI का बड़ा फैसला, अब महंगी होगी लोन की EMI, करोड़ों ग्राहकों पर असर

नई दिल्ली। महंगाई के दबाव और वैश्विक स्तर पर बने आर्थिक जोखिमों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति को लेकर बड़ा फैसला लिया है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है। यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया।

रेपो रेट बढ़ने का असर बैंकिंग व्यवस्था के जरिए आम ग्राहकों तक पहुंच सकता है। खासतौर पर जिन लोगों का होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर है, उनके लिए आने वाले समय में कर्ज की लागत बढ़ने की आशंका है। हालांकि EMI में वास्तविक बदलाव संबंधित बैंक और लोन की ब्याज दर किस बेंचमार्क से जुड़ी है, इस पर निर्भर करेगा।

चार साल में पहली बार बढ़ी ब्याज दर

RBI का यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि केंद्रीय बैंक ने लंबे अंतराल के बाद रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। इससे पहले कई नीतिगत बैठकों में ब्याज दर को स्थिर रखा गया था। अक्टूबर की बैठक में बढ़ोतरी का फैसला महंगाई और बाहरी आर्थिक जोखिमों को देखते हुए किया गया।

रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्पकालिक फंड उपलब्ध कराता है। जब यह दर बढ़ती है तो बैंकों के लिए पैसे की लागत बढ़ सकती है और इसका असर आगे चलकर ग्राहकों को दिए जाने वाले कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।

होम लोन लेने वालों पर क्या होगा असर?

अगर बैंक अपने फ्लोटिंग रेट वाले लोन की ब्याज दर बढ़ाते हैं तो होम लोन ग्राहकों की परेशानी बढ़ सकती है। इसका असर दो तरह से दिखाई दे सकता है, या तो ग्राहक की मासिक EMI बढ़ सकती है, या बैंक लोन की अवधि बढ़ाकर मासिक किस्त को लगभग समान रख सकता है। जिन ग्राहकों का लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़ा है, उनके लिए RBI के रेपो रेट में बदलाव अपेक्षाकृत जल्दी ट्रांसमिट हो सकता है। वहीं फिक्स्ड रेट वाले कर्ज पर तत्काल प्रभाव जरूरी नहीं है।

कार और पर्सनल लोन भी हो सकते हैं महंगे

रेपो रेट में वृद्धि का असर सिर्फ होम लोन तक सीमित नहीं रहता। बैंक अगर अपनी उधारी दरों में संशोधन करते हैं तो नए कार लोन, टू-व्हीलर लोन और पर्सनल लोन की लागत भी बढ़ सकती है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में नया कर्ज लेने वाले ग्राहकों को पहले के मुकाबले अधिक ब्याज चुकाना पड़ सकता है। मौजूदा ग्राहकों पर असर उनके लोन के प्रकार और बैंक की नई ब्याज दर पर निर्भर करेगा।

RBI ने क्यों उठाया यह कदम?

केंद्रीय बैंक के सामने सबसे बड़ी चुनौती महंगाई से जुड़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, भू-राजनीतिक तनाव और खाद्य कीमतों से जुड़े जोखिम घरेलू महंगाई के लिए दबाव पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा मौसम और कृषि उत्पादन को लेकर अनिश्चितता भी खाद्य महंगाई के लिए जोखिम बढ़ा सकती है। ऐसे माहौल में ब्याज दर बढ़ाकर RBI का उद्देश्य मांग पर दबाव को नियंत्रित करना और महंगाई की उम्मीदों को काबू में रखना है।

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