कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! 1 दिसंबर से NPS के नए नियम होंगे लागू, जानें क्या बदलेगा

नई दिल्ली। नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करने वाले लोगों के लिए जरूरी खबर है। पेंशन फंड नियामक PFRDA ने NPS की स्कीमों के नाम और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उन्हें दिखाने के तरीके में बदलाव किया है। ये नए निर्देश 1 दिसंबर 2026 से लागू होंगे। 

इसका उद्देश्य निवेशकों को अलग-अलग पेंशन स्कीमों की पहचान करने और उनकी तुलना करने में आसानी देना है। PFRDA ने 2 नवंबर 2026 को जारी सर्कुलर में इन बदलावों की जानकारी दी है। खास बात यह है कि इनका असर मुख्य रूप से स्कीम चुनने और उसकी जानकारी देखने की प्रक्रिया पर पड़ेगा।

NPS स्कीमों के नाम रखने का बदलेगा तरीका

नए नियमों के तहत पेंशन फंड को अपनी स्कीमों के नाम एक निर्धारित प्रारूप में रखने होंगे। इसमें पेंशन फंड का संक्षिप्त नाम, NPS और स्कीम का अलग नाम शामिल होगा। वहीं, A से E तक के कैटेगरी कोड स्कीम के नाम का हिस्सा नहीं होंगे। अगर एक ही कैटेगरी में किसी पेंशन फंड की कई स्कीमें हैं, तो उनके नाम भी अलग-अलग रखने होंगे। Tier II स्कीम के नाम के अंत में Tier II लिखना जरूरी होगा।

स्कीम के साथ दिखेगी रिस्क की जानकारी

अब केवल स्कीम का नाम बताना पर्याप्त नहीं होगा। विज्ञापन, ब्रोशर और दूसरी सार्वजनिक जानकारियों में स्कीम के साथ उसकी पूरी कैटेगरी या ग्रोथ कैटेगरी भी प्रदर्शित करनी होगी। इससे निवेशक समझ सकेंगे कि संबंधित स्कीम किस तरह की है और उसमें कितना जोखिम जुड़ा है।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिलेंगे ज्यादा विकल्प

नए नियमों के तहत PoP प्लेटफॉर्म पर निवेशक जिस कैटेगरी या जोखिम स्तर का चुनाव करेगा, उसी के अनुसार अलग-अलग पेंशन फंड की स्कीमें दिखाई जाएंगी। यानी निवेशक एक ही कैटेगरी में कई पेंशन फंडों के विकल्पों की तुलना कर सकेगा। हालांकि, प्लेटफॉर्म किसी खास फंड की स्कीम को ऊपर दिखा सकता है या पहले से चुनकर रख सकता है, लेकिन अन्य उपलब्ध फंडों की स्कीमें दिखाना भी जरूरी होगा।

पेंशन फंड की वेबसाइट पर क्या होगा नियम?

अगर निवेशक अपनी इच्छा से किसी ऐसे पेंशन फंड की वेबसाइट या ऐप पर जाता है, जिसके पास PoP लाइसेंस भी है और वहीं से खाता खोलने की प्रक्रिया पूरी करता है, तो उस प्लेटफॉर्म पर केवल उसी फंड की स्कीमें दिखाई जा सकती हैं। वहीं NPS Central और CRA प्लेटफॉर्म पर चुनी गई कैटेगरी के सभी पेंशन फंडों की स्कीमें दिखानी होंगी।

मौजूदा निवेशकों पर क्या पड़ेगा असर?

इन बदलावों से मौजूदा NPS निवेशकों की पेंशन या निवेश पर मिलने वाले रिटर्न में अपने आप कोई बदलाव नहीं होगा। न ही यह अंशदान बढ़ाने या घटाने से जुड़ा फैसला है। इसका मुख्य उद्देश्य स्कीमों की जानकारी को पारदर्शी बनाना और निवेश के विकल्पों की तुलना आसान करना है।

ऐसे में NPS में नया निवेश करने वाले और पहले से जुड़े लोगों को स्कीम चुनते समय उसके नाम के साथ कैटेगरी, जोखिम स्तर और निवेश से जुड़ी जानकारी भी ध्यान से देखनी चाहिए।

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