पुराने बागानों की बदलेगी तस्वीर
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के मुताबिक, पुराने पेड़ों से बेहतर उत्पादन लेने के लिए उनकी नियमित देखभाल जरूरी है। इसके लिए सूखी और बेकार शाखाओं की कटाई, पेड़ों की छंटाई तथा पोषक तत्वों के उचित इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। यह योजना उद्यान निदेशालय की एकीकृत बागवानी विकास योजना के तहत संचालित की जा रही है।
किसानों को मिलेगा इतना अनुदान
योजना के तहत पेड़ों की सूखी शाखाओं की कटाई और छत्र प्रबंधन के लिए प्रति इकाई 10 हजार रुपये की लागत तय की गई है। इस पर किसानों को 40 प्रतिशत यानी 4 हजार रुपये की सहायता मिलेगी। वहीं, पोषक तत्व प्रबंधन के लिए प्रति इकाई 40 हजार रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसमें सरकार की ओर से 16 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इससे किसानों को बागानों की देखभाल पर होने वाले खर्च में राहत मिलेगी।
बिहार के 19 जिलों के किसानों को मिलेगा लाभ
वित्तीय वर्ष 2026-27 में यह योजना राज्य के 19 जिलों में लागू की जानी है। इनमें बांका, भागलपुर, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, कटिहार, खगड़िया, मधुबनी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, पश्चिमी चंपारण, पटना, पूर्वी चंपारण, पूर्णिया, सहरसा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, सुपौल और वैशाली शामिल हैं।
किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस
पुराने बागानों का वैज्ञानिक तरीके से रखरखाव होने पर पेड़ों की सेहत और फल उत्पादन में सुधार हो सकता है। इससे आम और लीची की खेती करने वाले किसानों को लंबे समय में फायदा मिलने की उम्मीद है। बिहार सरकार की यह पहल पुराने बागानों को दोबारा उत्पादक बनाने और किसानों को आर्थिक सहायता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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