तीन साल में मिलेंगे छह अवसर
हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार, वर्ष 2026 से 2028 के बीच हर साल दो बार टीईटी परीक्षा आयोजित की जानी है। इस तरह शिक्षामित्रों को तीन वर्षों में कुल छह मौके मिल सकते हैं। इससे अभ्यर्थियों को अपनी तैयारी मजबूत करने और परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।
विशेष टीईटी में शामिल करने की मांग खारिज
हालांकि, शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी परीक्षा में शामिल करने की मांग पर कोर्ट ने सहमति नहीं जताई। डिवीजन बेंच ने कहा कि शिक्षामित्रों और सहायक अध्यापकों की सेवा संबंधी स्थिति अलग-अलग है। इसलिए दोनों को समान श्रेणी में रखकर विशेष परीक्षा का लाभ नहीं दिया जा सकता।
वसीम अहमद की अपील पर आया कोर्ट का फैसला
आपको बता दें की इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने यह निर्णय वसीम अहमद की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने विशेष टीईटी में शामिल होने की मांग भले ही स्वीकार नहीं की, लेकिन नियमित टीईटी के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अब शिक्षामित्रों की नजरें आगामी टीईटी परीक्षाओं पर रहेंगी। कोर्ट के इस निर्देश से उन्हें परीक्षा पास करने के लिए बार-बार अवसर मिलने का रास्ता खुला है।

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