शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया है कि भुगतान की प्रक्रिया में किसी तरह की बेवजह देरी नहीं होनी चाहिए। यह फैसला शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया। इसमें केवल नियमित शिक्षकों ही नहीं, बल्कि स्कूलों में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाने वाले अन्य कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर भी ध्यान देने को कहा गया है।
इन कर्मचारियों को मिलेगा बकाया वेतन का लाभ
शिक्षा मंत्री ने लिपिक, परिचारी, शिक्षा सेवक, तालीमी मरकज, शारीरिक शिक्षक और संस्कृत व मदरसा विद्यालयों के शिक्षकों के लंबित भुगतान को जल्द पूरा कराने का निर्देश दिया है। विभागीय अधिकारियों को संबंधित मामलों की समीक्षा करके छठ से पहले भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया है। इससे उन कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, जिन्हें काफी समय से अपने वेतन का इंतजार करना पड़ रहा है।
सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा में बदलाव पर भी चर्चा
बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा से जुड़े एक अन्य प्रस्ताव पर भी विचार किया गया। इसमें सेवानिवृत्त कर्मियों को दोबारा काम पर रखने के लिए अधिकतम आयु सीमा 61 वर्ष से बढ़ाकर 64 वर्ष करने का प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा 65 वर्ष की उम्र पार कर चुके अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाने के विषय पर भी चर्चा हुई। हालांकि, उम्र सीमा में बदलाव को फिलहाल प्रस्ताव के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति पर सख्ती
सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए भी मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। बैठक में सामने आया कि करीब 5 प्रतिशत शिक्षक अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कर रहे हैं। इस मामले को गंभीर मानते हुए जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने को कहा गया है। शिक्षा सेवकों और तालीमी मरकज के कर्मचारियों की उपस्थिति कम से कम 75 प्रतिशत रखने का लक्ष्य तय करने के लिए भी एसओपी तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

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