अब देश में होंगी 850 विशेष अदालतें
सरकार ने फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई है। फिलहाल देश में 779 ऐसी अदालतें हैं, जिन्हें बढ़ाकर 850 करने का लक्ष्य रखा गया है। यह व्यवस्था देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित हो रही है।
इन अदालतों में भारतीय दंड कानून के तहत दुष्कर्म के मामलों और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम से जुड़े अपराधों की सुनवाई को प्राथमिकता दी जाती है। अदालतों की संख्या बढ़ने से लंबित मुकदमों का बोझ कम करने में सहायता मिल सकती है।
2019 में शुरू हुई थी यह व्यवस्था
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना की शुरुआत 2 अक्टूबर 2019 को की गई थी। इसे आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 के बाद लागू किया गया था। शुरुआत से ही इसका उद्देश्य यौन अपराधों से जुड़े मामलों का समय पर निपटारा करना रहा है। अब सरकार ने इसकी अवधि मार्च 2031 तक बढ़ाकर न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम उठाया है।
योजना पर खर्च होंगे 3,788 करोड़ रुपये
इस कार्यक्रम को जारी रखने के लिए कुल 3,788.04 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 2,353.15 करोड़ रुपये का योगदान दिया जाएगा, जिसकी व्यवस्था निर्भया फंड से होगी। इस राशि का इस्तेमाल विशेष अदालतों के संचालन और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में किया जाएगा।
हर अदालत में होगी विशेष टीम की तैनाती
फास्ट ट्रैक कोर्ट को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए प्रत्येक अदालत में एक न्यायाधीश, विशेष सरकारी वकील और छह सहायक कर्मचारियों की व्यवस्था होगी। इसके अलावा पीड़ित बच्चों और संवेदनशील गवाहों को बिना डर अपनी बात रखने में मदद मिले, इसके लिए अनुकूल अदालती वातावरण तैयार किया जाएगा। गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए विशेष केंद्र भी बनाए जाएंगे।

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