दरअसल, पंचायती राज विभाग ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में मिली जिम्मेदारी की अवधि अगले छह महीने तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसे मंजूरी के लिए शासन के पास भेज दिया गया है। यदि प्रस्ताव को हरी झंडी मिलती है तो हजारों ग्राम प्रधानों को फिलहाल अपनी जिम्मेदारी पर बने रहने का मौका मिल सकता है।
25 नवंबर को खत्म हो रहा मौजूदा कार्यकाल
प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों के निवर्तमान प्रधानों को 26 मई 2026 को प्रशासक नियुक्त किया गया था। यह व्यवस्था छह महीने या पंचायत चुनाव होने तक लागू की गई थी। अब 25 नवंबर को उनकी मौजूदा अवधि पूरी होने जा रही है। ऐसे में विभाग ने आगे की व्यवस्था के लिए कार्यकाल बढ़ाने की पहल की है।
चुनाव में देरी की एक बड़ी वजह ओबीसी आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया भी मानी जा रही है। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है। ग्राम प्रधान संगठन भी ओबीसी आरक्षण तय होने के बाद ही चुनाव कराने की मांग कर रहा है। इसी वजह से प्रशासक के रूप में प्रधानों की जिम्मेदारी आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
हाईकोर्ट ने तीन महीने में चुनाव कराने का दिया है निर्देश
पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 अक्टूबर 2026 को महत्वपूर्ण निर्देश दिया था। अदालत ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर चुनाव कराने को कहा था। साथ ही स्पष्ट किया था कि चुनाव मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के तहत ही कराए जाएं। इसमें ओबीसी के लिए निर्धारित 27 प्रतिशत आरक्षण के साथ एससी, एसटी और महिलाओं के आरक्षण नियम भी लागू रहेंगे।
अब सबकी नजर शासन के फैसले पर टिकी है। छह महीने का कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है या नहीं, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल ग्राम प्रधानों और पंचायत चुनाव का इंतजार कर रहे लोगों की निगाहें सरकार के अगले कदम पर हैं।

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