इससे उन वृद्धजनों को काफी राहत मिल रही है, जिनके पास नियमित आमदनी का कोई साधन नहीं है। सरकार का उद्देश्य है कि बुजुर्गों को अपनी छोटी-मोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े। पेंशन की रकम से दवाइयों, रोजमर्रा के खर्च और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है।
जौनपुर बना नंबर वन, ये जिले भी टॉप-10 में शामिल
वृद्धावस्था पेंशन योजना के लाभार्थियों की संख्या के मामले में जौनपुर प्रदेश में पहले स्थान पर है। यहां 2,24,345 बुजुर्गों को योजना का लाभ मिल रहा है। वहीं आजमगढ़ 1,97,129 लाभार्थियों के साथ दूसरे और गोरखपुर 1,72,917 लाभार्थियों के साथ तीसरे स्थान पर है।
इसके अलावा गाजीपुर, हरदोई, बलिया, प्रयागराज, प्रतापगढ़, कुशीनगर और अंबेडकर नगर भी टॉप-10 जिलों में शामिल हैं। इन जिलों में बड़ी संख्या में बुजुर्गों को हर महीने पेंशन मिल रही है।
पात्र बुजुर्गों के सत्यापन पर विशेष जोर
योजना का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने के लिए समाज कल्याण विभाग लाभार्थियों के सत्यापन की प्रक्रिया भी चला रहा है। सरकार की कोशिश है कि कोई भी पात्र बुजुर्ग आर्थिक सहायता से वंचित न रहे और पेंशन वितरण में पारदर्शिता बनी रहे।
समाज कल्याण विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण के मुताबिक, प्रदेश सरकार बुजुर्गों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है। इसी दिशा में लाखों वृद्धजनों को नियमित रूप से पेंशन उपलब्ध कराई जा रही है।

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