हाई ब्लड प्रेशर की वजह से दिल, दिमाग, किडनी और आंखों पर बुरा असर पड़ सकता है। लंबे समय तक बीपी नियंत्रित नहीं रहने पर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच कराई जाए और शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों को समझा जाए।
हाई बीपी होने पर दिख सकते हैं ये 5 संकेत
1. बार-बार सिरदर्द होना
अगर आपको बार-बार सिरदर्द की शिकायत रहती है, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि सामान्य हाई बीपी में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते, लेकिन बहुत अधिक रक्तचाप होने पर सिरदर्द की समस्या हो सकती है। लगातार सिरदर्द होने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
2. चक्कर आना और बेचैनी
कभी-कभी अचानक चक्कर आना, घबराहट या बेचैनी महसूस होना भी स्वास्थ्य संबंधी किसी परेशानी का संकेत हो सकता है। हालांकि ये लक्षण केवल हाई बीपी की वजह से ही नहीं होते। इनके पीछे दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। इसलिए सही कारण जानने के लिए ब्लड प्रेशर की जांच कराना जरूरी है।
3. आंखों के सामने धुंधलापन आना
अगर आपको अचानक धुंधला दिखाई देने लगे या आंखों के सामने अंधेरा छाने लगे, तो इसे हल्के में न लें। बहुत अधिक बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर आंखों की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। अचानक नजर में बदलाव होने पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।
4. सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी
सीने में दबाव महसूस होना, दर्द होना या सांस लेने में परेशानी होना गंभीर संकेत हो सकते हैं। हाई बीपी लंबे समय तक रहने पर दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। सीने में दर्द या सांस लेने में अचानक परेशानी होने पर तत्काल इमरजेंसी चिकित्सा सहायता लें।
5. नाक से खून आना
कुछ लोगों को नाक से खून आने पर हाई बीपी की आशंका होती है। हालांकि नाक से खून आने का सीधा मतलब यह नहीं है कि आपका ब्लड प्रेशर बढ़ गया है। इसके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। अगर यह समस्या बार-बार होती है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
कितनी होनी चाहिए सामान्य ब्लड प्रेशर की रीडिंग?
आमतौर पर वयस्कों में 120/80 mmHg से कम ब्लड प्रेशर को सामान्य माना जाता है। लगातार 130/80 mmHg या उससे अधिक रीडिंग आने पर हाई बीपी की आशंका हो सकती है। हालांकि अलग-अलग चिकित्सा दिशानिर्देशों में इसकी श्रेणियां कुछ अलग हो सकती हैं। केवल एक बार की रीडिंग के आधार पर हाई बीपी का फैसला नहीं करना चाहिए। इसके लिए सही तरीके से बार-बार जांच और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

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