75 में से 50 जिलों का काम पूरा
पंचायत चुनाव में पिछड़े वर्ग को मिलने वाले आरक्षण का आधार तैयार करने के लिए आयोग जिलों में सर्वे और जनसुनवाई कर रहा है। अब तक 75 जिलों में से 50 जिलों का दौरा पूरा हुआ है, जबकि 25 जिलों में यह प्रक्रिया अभी बाकी है। बचे हुए जिलों का सर्वे, आंकड़ों का संकलन और उनका विश्लेषण करने में अतिरिक्त समय लग सकता है।
आयोग मांग सकता है तीन महीने का समय
रिपोर्टों के मुताबिक, आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए सरकार से कम से कम तीन महीने का अतिरिक्त समय मांग सकता है। बताया जा रहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में दिसंबर के अंत तक भी रिपोर्ट सौंपना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, समय बढ़ाने को लेकर अंतिम फैसला सरकार को करना है।
हाईकोर्ट के आदेश से बढ़ी चुनौती
पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 अक्टूबर 2026 को राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने का निर्देश दिया था। ऐसे में पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में देरी होने से चुनावी तैयारियों के सामने चुनौती खड़ी हो सकती है। हालांकि, रिपोर्ट में देरी से अदालत की समयसीमा अपने आप नहीं बदलती।
यूपी पंचायत चुनाव कब होंगे?
आयोग की रिपोर्ट आने के बाद सरकार पिछड़ा वर्ग आरक्षण से जुड़ी सिफारिशों पर आगे की कार्रवाई करेगी। इसके बाद आरक्षण निर्धारण और चुनावी कार्यक्रम की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल पंचायत चुनाव की तारीखों का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। ऐसे में प्रदेश के ग्रामीण इलाकों के लोगों और चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों की नजर आयोग की रिपोर्ट और सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है।

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