नाटो का पलटवार तय! रूस का फाइटर दिखा तो आसमान में होगा धुआं

न्यूज डेस्क। रूस-यूक्रेन युद्ध ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। जहां पहले लड़ाई सीमित थी यूक्रेन तक, अब रूस की हवाई गतिविधियाँ यूरोप के कई देशों की सीमाओं तक पहुँच चुकी हैं। हाल के हफ्तों में रूस के ड्रोन और फाइटर जेट्स को पोलैंड, रोमानिया और एस्टोनिया जैसे नाटो सदस्य देशों के एयरस्पेस में देखा गया है और यही घटनाएं अब पूरे नाटो को एक निर्णायक मोर्चे पर ला खड़ा कर चुकी हैं।

रूसी आक्रामकता का नया चेहरा

पिछले कुछ हफ्तों में जो घटनाएं घटीं, वे केवल "ग़लती से घुसपैठ" नहीं कही जा सकतीं। 10 सितंबर को पोलैंड के आसमान में 19 रूसी ड्रोन की मौजूदगी ने खतरे की घंटी बजा दी। फिर 13 सितंबर को रोमानिया के एयरस्पेस में घुसे ड्रोन को रोकने के लिए एफ-16 फाइटर जेट तैनात किए गए। 19 सितंबर को एस्टोनिया में रूसी फाइटर जेट के प्रवेश से हड़कंप मच गया।

नाटो की रणनीति: कार्रवाई होगी

इन उकसावे भरे कदमों के बाद नाटो देशों में अब एक ऐतिहासिक सहमति बन चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि भविष्य में कोई भी रूसी फाइटर जेट किसी नाटो सदस्य देश के हवाई क्षेत्र में घुसता है, तो उसे सीधे मार गिराया जाएगा। हालाँकि, एस्टोनिया की घटना में आखिरी समय में फाइटर जेट को वापस लौटने दिया गया, लेकिन वह क्षण एक चेतावनी से कहीं बढ़कर था, यह संकेत था कि अगली बार नाटो पीछे नहीं हटेगा।

ब्रिटेन और फ्रांस की सख्त भूमिका

पोलैंड की घटना के दौरान ब्रिटेन ने अपने फाइटर जेट्स को तुरंत एक्शन में भेजा, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि नाटो अब केवल बैठकर बैठकें नहीं करेगा, बल्कि हवाई हमलों का जवाब हवा से ही देगा। फ्रांस की राफेल फोर्स और अमेरिका के एफ-16 जेट्स को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।

रूस की मंशा क्या है?

विश्लेषकों का मानना है कि रूस का उद्देश्य न केवल यूक्रेन को घुटनों पर लाना है, बल्कि नाटो की एकता को भी परीक्षा में डालना है। यदि नाटो देश आपस में असहमति दिखाते हैं या किसी सदस्य देश पर हमला होने पर संयुक्त जवाब नहीं देते, तो रूस को भविष्य की रणनीति के लिए हरी झंडी मिल सकती है। लेकिन नाटो की ताज़ा सहमति ने इस भ्रम को तोड़ दिया है।

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