संयुक्त वैज्ञानिक सर्वे शुरू
गन्ना आयुक्त मिनिस्थी एस के निर्देश पर यह अभियान शुरू हुआ है, जिसमें भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (ICSI) और उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद (UPCSR) के विशेषज्ञ मिलकर काम कर रहे हैं। हर गन्ना मंडल में दो-दो वैज्ञानिक नियुक्त किए गए हैं, जो जिला गन्ना अधिकारियों और उपायुक्तों के साथ मिलकर फसल की स्थिति का आकलन कर रहे हैं।
ड्रोन से होगा स्प्रे
जिन खेतों में पानी भरने की वजह से फसल तक पहुंचना कठिन है, वहां ड्रोन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। इन ड्रोन की मदद से कीटनाशकों और फफूंदनाशकों का छिड़काव किया जाएगा, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में रोगों और कीटों के फैलाव पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
एडवाइजरी जल्द जारी होगी
सर्वेक्षण के आधार पर गन्ना विभाग एक वैज्ञानिक एडवाइजरी जारी करेगा, जिसमें यह बताया जाएगा कि किस क्षेत्र में कौन-कौन से कीट या रोग पाए गए हैं और उनसे निपटने के लिए कौन से रसायन उपयोगी होंगे। क्षेत्रीय अधिकारियों को पहले से स्प्रे सिस्टम और ड्रोन तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों को सब्सिडी में रसायन
राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए 25% से 50% तक की सब्सिडी पर कीटनाशक और अन्य रसायन उपलब्ध कराने की घोषणा की है। ये रसायन चीनी मिलों और गन्ना विकास समितियों के माध्यम से वितरित किए जाएंगे। इसके साथ ही वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी दिया जाएगा कि कैसे सुरक्षित और प्रभावी ढंग से छिड़काव किया जाए।
गन्ना किसानों के लिए बड़ी बात
उत्तर प्रदेश में करीब 30 लाख हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की खेती होती है और इससे लगभग 50 लाख किसान परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। ऐसे में सरकार और वैज्ञानिक संस्थानों की यह संयुक्त पहल किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने में एक बड़ा सहारा बन सकती है।
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