बिहार में नीतीश की घोषणाओं का तुफान, जनता हुई फिदा!

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणाओं की झड़ी लगा दी है। राज्य के विभिन्न वर्गों, खासकर सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं और लाभकारी घोषणाएं सामने आई हैं, जिनका मकसद मतदाताओं का विश्वास जीतना और चुनावी समीकरण मजबूत करना है। हालांकि, इस पर विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘नकल’ करार दिया है।

मुफ्त बिजली से लेकर स्मार्टफोन तक की सौगात

नीतीश सरकार ने बिजली के मुफ्त उपभोग की सीमा बढ़ाकर अब हर महीने 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की घोषणा की है। यह कदम विपक्ष के 200 यूनिट मुफ्त बिजली वादे का जवाब माना जा रहा है, लेकिन सरकार इसे अपने विकास एजेंडे का हिस्सा बता रही है। 

इसके साथ ही, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए गांवों में कार्यरत 10,000 ‘विकास मित्रों’ को टैब खरीदने के लिए 25,000 रुपये की मदद देने का ऐलान किया गया है। इनके परिवहन भत्ते को भी बढ़ाकर 2,500 रुपये मासिक और स्टेशनरी भत्ते को 1,500 रुपये कर दिया गया है, जिससे ये लोग सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक बेहतर सेवा पहुंचा सकेंगे।

शिक्षा क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ी पहल की है। महादलित, अल्पसंख्यक और अति पिछड़े वर्ग के बच्चों को औपचारिक शिक्षा से जोड़ने वाले 30,000 से अधिक ‘शिक्षा सेवकों’ और ‘तालीमी मरकज’ को स्मार्टफोन खरीदने के लिए 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया गया है। इससे डिजिटल शिक्षा के विस्तार में मदद मिलेगी और शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ेगी।

गरीबों और युवाओं के लिए आर्थिक सहारा

बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों की पेंशन में लगातार वृद्धि की जा रही है। जून में पेंशन राशि में 700 रुपये की बढ़ोतरी के बाद, जुलाई में 1.11 करोड़ लाभार्थियों को मासिक 1100 रुपये की बढ़ी हुई पेंशन भेजी गई है। यह कदम आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के जीवन स्तर को बेहतर करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

युवाओं के लिए सरकार ने बेरोजगारी भत्ते की योजना लागू की है, जिसमें स्नातक और 12वीं पास बेरोजगार युवाओं को दो साल तक 1,000 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। इसके अलावा, महिला उद्यमियों को शुरुआती मदद के तौर पर 10,000 रुपये और व्यवसाय की प्रगति के आधार पर दो लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी, जिससे महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण होगा।

इसके जलाने नीतीश सरकार ने बिहार के निर्माण मजदूरों को वस्त्र भत्ते के तौर पर 5,000 रुपये देने का एलान किया हैं। जीविका, आंगनबाड़ी तथा आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि करने के फैसले भी सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

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