बिहार में 'किसानों' के लिए बड़ा अपडेट, सरकार दे रही सब्सिडी!

पटना। बिहार सरकार ने राज्य के किसानों के लिए एक नई राहत भरी योजना शुरू की है। कृषि विभाग के उद्यान निदेशालय द्वारा राष्ट्रीय बांस मिशन योजना का सफलतापूर्वक कार्यान्वयन करते हुए किसानों को बांस की खेती के लिए आकर्षक अनुदान देने का ऐलान किया गया है। इस योजना का मकसद न केवल बांस उत्पादन को बढ़ावा देना है, बल्कि इससे किसानों की आय में वृद्धि भी करना है।

राष्ट्रीय बांस मिशन योजना का विस्तार

राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के तहत बिहार के 27 जिलों के किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। जिन जिलों को योजना में शामिल किया गया है, उनमें अररिया, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, दरभंगा, पूर्वी चम्पारण, गोपालगंज, जमुई, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, मधुबनी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, पूर्णियाँ, सहरसा, समस्तीपुर, सारण, शिवहर, शेखपुरा, सीतामढ़ी, सिवान, सुपौल, वैशाली और पश्चिम चम्पारण शामिल हैं।

कैसे मिलेगा लाभ?

इस योजना के तहत अनुदान वितरण ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर किया जाएगा। एक परिवार में पति और पत्नी दोनों योजना के लाभार्थी हो सकते हैं, यदि उनकी अलग-अलग नामों से पंजीकृत भूमि हो। लाभ पाने के लिए किसानों को अपने आवेदन के साथ भूमि-स्वामित्व प्रमाण पत्र, दो वर्ष पूर्व की राजस्व रसीद, ऑनलाइन अपडेटेड रसीद या वंशावली का वैध प्रमाण जमा करना होगा।

अनुदान की राशि और योजना की विशेषताएं

राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के अंतर्गत निजी क्षेत्र में उच्च घनत्व वाली बांस की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 1.2 लाख रुपये की लागत मानते हुए, सरकार 50 प्रतिशत यानी 60 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक अनुदान दे रही है। यह अनुदान दो वर्षों में दिया जाएगा, जिसमें पहले वर्ष में 60 प्रतिशत और दूसरे वर्ष में 40 प्रतिशत राशि का भुगतान होगा। फार्मों के किनारों (खेत के मेड़) पर बांस लगवाने के लिए भी अनुदान दिया जाएगा, जिसमें प्रति पौधे की लागत 300 रुपये मानकर 150 रुपये प्रति पौधा तक सहायता प्रदान की जाएगी।

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