राज्य सरकार ने इस बार करीब 3 लाख 47 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 30 हजार करोड़ रुपये अधिक है। बढ़ा हुआ बजट यह संकेत देता है कि बिहार की आर्थिक क्षमता मजबूत हो रही है और सरकार के पास विकास कार्यों को गति देने के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हैं।
शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता
इस बजट में शिक्षा क्षेत्र को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। स्कूल और उच्च शिक्षा के लिए सबसे बड़ा आवंटन किया गया है, जिससे नए शिक्षकों की नियुक्ति, स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, डिजिटल शिक्षा और उच्च शिक्षण संस्थानों को मजबूती मिलेगी। सरकार का मानना है कि शिक्षा में निवेश ही बिहार के युवाओं को बेहतर भविष्य दे सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और पूंजीगत खर्च
बजट में पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर सरकार ने साफ कर दिया है कि विकास का आधार मजबूत बुनियादी ढांचा होगा। सड़क, पुल, सिंचाई, बिजली और जल आपूर्ति जैसी परियोजनाओं पर खास जोर दिया गया है। इसके साथ ही पांच नए एक्सप्रेसवे बनाने की घोषणा से राज्य में आवागमन, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
कृषि और मखाना बोर्ड की स्थापना
कृषि क्षेत्र के लिए यह बजट खास माना जा रहा है। सरकार ने मखाना बोर्ड के गठन की घोषणा की है, जिससे मखाना उत्पादकों को बेहतर मूल्य, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और निर्यात के अवसर मिलेंगे। यह कदम बिहार की पारंपरिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में मदद करेगा।
रोजगार और विकसित बिहार का लक्ष्य
नीतीश कुमार सरकार पहले ही युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार देने का वादा कर चुकी है। इस बजट में उद्योग, निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए रोजगार सृजन को गति देने की कोशिश की गई है। “सात निश्चय-2” और आगे की योजनाओं के माध्यम से बिहार को विकसित राज्य बनाने का लक्ष्य दोहराया गया है।
महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण
बजट में महिलाओं को केंद्र में रखा गया है। महिला उद्यमिता, स्वयं सहायता समूह, छात्रवृत्ति और रोजगार से जुड़ी योजनाओं पर खर्च बढ़ाया गया है। इसके साथ ही गरीबों के लिए सस्ते आवास, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और कल्याणकारी योजनाओं को भी मजबूती दी गई है।
स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास पर विशेष ध्यान
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के विस्तार पर बड़ा बजट रखा गया है। वहीं ग्रामीण विकास के लिए भी भारी राशि का प्रावधान किया गया है, जिससे गांवों में सड़क, आवास, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा सके।

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