भारत-अमेरिका के बीच फ‍िर बढ़ी दोस्‍ती, टेंशन में चीन!

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के संबंध एक बार फिर नई ऊंचाई पर पहुंचते दिख रहे हैं। लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक गतिरोध को खत्म करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगाए गए ऊंचे टैरिफ में बड़ी कटौती का ऐलान किया है। इस फैसले के साथ ही दोनों देशों के रिश्तों में आई ठंडक दूर होती नजर आ रही है, वहीं इस नजदीकी से चीन की चिंता भी बढ़ गई है।

ट्रेड डील से टूटा गतिरोध

डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि भारत पर लगाए गए टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता हो चुका है, जिससे बीते एक साल से जारी खींचतान अब खत्म हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई ताकत मिलेगी और दोनों देशों के लोगों को इसका सीधा लाभ होगा।

रूसी तेल पर ट्रंप, भारत की चुप्पी

ट्रेड डील की घोषणा के साथ ही ट्रंप ने यह दावा भी किया कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी की ओर से जारी बयान में इस दावे की पुष्टि नहीं की गई। इसे लेकर कूटनीतिक हलकों में अलग-अलग अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन फिलहाल भारत ने इस मुद्दे पर संतुलित रुख बनाए रखा है।

नए अमेरिकी राजदूत की बड़ी भूमिका

भारत–अमेरिका संबंधों में आई इस नई ऊर्जा का श्रेय अमेरिका के नए राजदूत सर्गियो गोर को भी दिया जा रहा है। ट्रंप के बेहद करीबी माने जाने वाले गोर ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अमेरिका भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए गंभीर है। खास तौर पर क्‍वाड को लेकर उनके बयान ने क्षेत्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है।

क्‍वाड पर सख्त संदेश, चीन के लिए चेतावनी

क्‍वाड के भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों पर सर्गियो गोर ने साफ कहा कि यह संगठन कहीं नहीं जा रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कार्यभार संभालते ही क्‍वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की थी और आने वाले समय में कई अहम योजनाएं हैं, जिनका खुलासा अभी नहीं किया जाएगा। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया से मिलकर बना क्‍वाड चीन की हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती आक्रामकता को संतुलित करने का अहम मंच माना जाता है।

भारत में क्‍वाड शिखर बैठक की है उम्मीद

हालांकि वर्ष 2025 में प्रस्तावित क्‍वाड नेताओं की बैठक भारत में नहीं हो पाई थी, लेकिन अब ट्रेड डील और बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के बाद इसके जल्द आयोजित होने की संभावना जताई जा रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अमेरिका यात्रा को भी इसी संदर्भ में अहम माना जा रहा है। क्‍वाड को मजबूत करने की मांग इसलिए भी तेज हो रही है क्योंकि चीन लगातार हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दबाव की रणनीति अपनाए हुए है।

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