इस चुप्पी ने कर्मचारियों के बीच असंतोष को और गहरा कर दिया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन सैलरी और पेंशन में सुधार को लगातार टाला जा रहा है।
हड़ताल की चेतावनी, बढ़ा दबाव
केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और श्रमिक महासंघ (CCGEW) पहले ही सरकार को चेतावनी दे चुका है। संगठन ने साफ कहा है कि यदि 8वें वेतन आयोग और अन्य लंबित मांगों पर सरकार ने गंभीर बातचीत शुरू नहीं की, तो 12 फरवरी 2026 को एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी। CCGEW का कहना है कि बजट में वेतन और पेंशन को लेकर कोई संकेत न मिलना कर्मचारियों की चिंताओं को नजरअंदाज करने जैसा है।
बजट में क्या रहा फोकस?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में पूंजीगत व्यय, इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार सृजन और आर्थिक सुधारों पर जोर दिया। सरकार का फोकस विकास योजनाओं और दीर्घकालिक निवेश पर रहा, लेकिन कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन से जुड़े मुद्दों को बजट में जगह नहीं मिली।
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगें
CCGEW ने कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र में कई अहम मांगें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं:
8वें वेतन आयोग के Terms of Reference (ToR) में बदलाव
वेतन और पेंशन में ठोस वृद्धि पर स्पष्ट सिफारिश
50% महंगाई भत्ता (DA/DR) को मूल वेतन या पेंशन में शामिल करना
1 जनवरी 2026 से 20% अंतरिम राहत देने की मांग
NPS और UPS को समाप्त कर सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करना
वेतन बढ़ोतरी में देरी क्यों?
सरकार की ओर से अब तक यह स्पष्ट किया गया है कि 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट अभी तैयार नहीं हुई है। जब तक आयोग अपनी सिफारिशें सौंप नहीं देता, तब तक वेतन या पेंशन में संशोधन के लिए बजटीय प्रावधान करना मुश्किल है। इसके अलावा, वेतन बढ़ोतरी का सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ता है। मौजूदा आर्थिक हालात में सरकार किसी बड़े वित्तीय बोझ से बचना चाहती है, इसलिए तत्काल राहत देने से परहेज किया गया है।

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