ऑडिट में आई करोड़ों की अनियमितता
गांवों में विकास कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमित रूप से ऑडिट कराया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत बहराइच जिले में वित्तीय वर्ष 2012-13 से 2018-19 तक 117 ग्राम पंचायतों की जांच की गई। ऑडिट रिपोर्ट में करीब 9 से 10 करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ी सामने आई है। इन अनियमितताओं में सरकारी धन के दुरुपयोग, अधूरे कार्य और अभिलेखों में गड़बड़ी जैसे मामले शामिल बताए गए हैं।
ग्राम प्रधान और सचिव दोनों होंगे जिम्मेदार
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में केवल पंचायत सचिव ही नहीं, बल्कि संबंधित ग्राम प्रधान भी जिम्मेदार माने जाएंगे। सभी को नोटिस जारी कर निर्देश दिए गए हैं कि वे विकास कार्यों से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करें और अनियमितता में पाई गई सरकारी राशि को निर्धारित समय में जमा कराएं।
पैसा नहीं लौटाया तो नहीं मिलेगा नो ड्यूज सर्टिफिकेट
सबसे अहम बात यह है कि यदि प्रधानों ने सरकारी धन वापस नहीं किया, तो उन्हें पंचायती राज विभाग की ओर से नो ड्यूज प्रमाण पत्र नहीं दिया जाएगा। बिना इस प्रमाण पत्र के वे पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। यानी वित्तीय गड़बड़ी अब सीधे तौर पर राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करेगी।
जिले में 62 ग्राम प्रधानों को ताजा नोटिस, प्रशासन का सख्त संदेश
जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने हाल ही में वित्तीय वर्ष 2017-18 के 28 और 2018-19 के 34 ग्राम पंचायतों के प्रधानों को वसूली नोटिस जारी किए हैं। इससे पहले 2012-13 से 2015-16 तक के 55 ग्राम पंचायतों के प्रधानों को भी नोटिस भेजे जा चुके हैं। सभी को स्पष्ट निर्देश है कि तय रकम शीघ्र जमा कराई जाए।
जिला पंचायत राज अधिकारी चंद्रभान सिंह के अनुसार, यदि संबंधित प्रधानों ने धनराशि जमा नहीं की, तो उन्हें चुनाव लड़ने से वंचित होना पड़ेगा। प्रशासन का यह कदम गांवों में विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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