यूपी में 'UP-AGREES' प्रोजेक्ट शुरू, किसानों की बल्ले-बल्ले

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों की बेहतरी और प्रदेश की कृषि को नई दिशा देने के लिए UP-AGREES प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र, नई तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराना है, जिससे न केवल उत्पादन बढ़े बल्कि किसानों की आय में स्थायी सुधार हो सके।

छोटे उद्योग और रोजगार के अवसर

UP-AGREES प्रोजेक्ट केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे और गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब राज्य की कृषि योजनाएं मूल्य संवर्धन और रोजगार सृजन पर भी ध्यान दे रही हैं।

तकनीक और डिजिटल सहायता

किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड मोबाइल ऐप के जरिए निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता के अनुसार खेती करना संभव हो रहा है। साथ ही, प्रदेश में KCC (किसान क्रेडिट कार्ड) और मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि जैसी योजनाओं के तहत 25 लाख नए किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

MSP और फसल मूल्य में बढ़ोतरी

इस वर्ष धान और गन्ना के MSP में वृद्धि की गई है। साधारण धान का MSP ₹2,369 और ग्रेड-ए धान का ₹2,389 तय किया गया है। वहीं, गन्ने की अगेती प्रजाति का मूल्य ₹400 और सामान्य प्रजाति का ₹390 प्रति क्विंटल किया गया है। इससे सीधे तौर पर किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा।

सब्सिडी और सिंचाई सहायता

प्रदेश में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पर सीमांत और लघु किसानों को 70–80%, जबकि अन्य किसानों को 60–70% तक सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा, मसाला और सब्जी उत्पादन पर 40–50% सब्सिडी प्रदान की जा रही है। पॉलीहाउस और हाइटेक नर्सरियों के माध्यम से किसानों को उन्नत खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

“पहले आओ, पहले पाओ” नीति

सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों को विभागीय वेबसाइट पर पंजीकरण करना होगा। आधार, बैंक विवरण और भूमि अभिलेख के आधार पर चयन पहले आओ, पहले पाओ के सिद्धांत पर किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

बाजार, मौसम और खरीद केंद्रों की सुविधा

सरकार किसानों को मंडी भाव और मौसम की जानकारी प्रतिदिन निःशुल्क उपलब्ध करवा रही है। प्रदेश में 4000 से अधिक सक्रिय खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से अधिकांश ऐसे ब्लॉकों में हैं जहाँ पहले स्थायी व्यवस्था नहीं थी। इससे फसल की त्वरित बिक्री और परिवहन खर्च में कमी आई है।

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