सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि गन्ना की खेती के साथ तिलहन और दलहन फसलों को जोड़ने से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों की आमदनी में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।
गन्ना क्षेत्र में अंतः फसल से बढ़ेगी आय
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में लगभग 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती की जाती है। इसमें करीब आधा क्षेत्र नया बोया गया है, जबकि शेष हिस्सा पेडी फसल के अंतर्गत आता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतने बड़े क्षेत्र में यदि वैज्ञानिक तरीके से अंतः फसली खेती अपनाई जाए, तो कृषि उत्पादन में बड़ा बदलाव संभव है। सीएम योगी ने कहा कि गन्ना के साथ तिलहनी और दलहनी फसलों की खेती किसानों को अतिरिक्त आमदनी का अवसर देगी और भूमि की उर्वरता भी बनी रहेगी।
किन फसलों को दी जाएगी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान की सिफारिशों का हवाला देते हुए फसल चयन पर विशेष जोर दिया। रबी सीजन में सरसों और मसूर, जबकि जायद सीजन में उड़द और मूंग। इन फसलों को गन्ने के साथ उगाने से बेहतर उत्पादन और बाजार में अच्छा मूल्य मिलने की संभावना जताई गई।
मिशन मोड में लागू होगी योजना
मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को निर्देश दिए कि योजना को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे मिशन की तरह जमीन पर उतारा जाए। इसके लिए वर्षवार रोडमैप तैयार करने, अनुदान और सहायता की स्पष्ट व्यवस्था करने तथा किसानों तक तकनीकी जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों की मदद से क्षेत्र विशेष के अनुसार अंतः फसलों का चयन किया जाए, ताकि किसानों को अधिकतम लाभ मिल सके।
एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की दिशा में कदम
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में कृषि की भूमिका बेहद अहम है। अंतः फसली खेती इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है। इससे किसानों की आय सिर्फ दोगुनी ही नहीं, बल्कि कई गुना तक बढ़ सकती है।
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