धमाकेदार सुधार: बिहार में जमीन रजिस्ट्री में OTP लागू, धोखाधड़ी का खेल खत्म

पटना। बिहार में जमीन और फ्लैट की रजिस्ट्री प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब जमीन रजिस्ट्री के लिए ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) आधारित अप्वाइंटमेंट सिस्टम लागू कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था का मकसद धोखाधड़ी पर रोक लगाना और असली खरीदार-विक्रेता की सीधे भागीदारी सुनिश्चित करना है।

अब कैसे होगी रजिस्ट्री?

नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री कराने से पहले NGDRS पोर्टल पर ऑनलाइन स्लॉट बुक करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसमें खरीदार और विक्रेता का पूरा विवरण, जमीन/फ्लैट की जानकारी, एमवीआर (Minimum Value Register) के अनुसार मूल्यांकन भरना जरूरी है। इसके बाद सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में दस्तावेज जमा करने के लिए तिथि और समय का ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट लेना होता है।

जैसे ही अप्वाइंटमेंट के लिए आवेदन किया जाता है, खरीदार और विक्रेता दोनों के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाता है, जिसकी वैधता सिर्फ एक मिनट की होती है। तय समय में ओटीपी दर्ज नहीं करने पर पूरी प्रक्रिया दोबारा करनी पड़ती है।

नई व्यवस्था से काम की रफ्तार धीमी

ओटीपी सिस्टम लागू होने के बाद रजिस्ट्री प्रक्रिया की गति पर असर पड़ा है। जहां पहले प्रतिदिन 50–60 रजिस्ट्री हो रही थीं, अब यह संख्या घटकर 10–15 पर आ गई है। इसका सबसे अधिक असर उन व्यापारियों और प्रॉपर्टी डीलर एजेंट्स पर पड़ रहा है, जो किसानों से जमीन खरीदकर उद्योग या व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए उपयोग करते हैं।

बिचौलियों पर गिरी गाज, आम लोगों को फायदा

नई ओटीपी व्यवस्था से सेवा शुल्क लेकर रजिस्ट्री कराने वाले बिचौलियों को भारी परेशानी होगी। हालांकि इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा फायदा यह है कि खरीदार और विक्रेता सीधे अपने मोबाइल पर अपॉइंटमेंट की जानकारी प्राप्त कर लेते हैं, जिससे अनावश्यक दौड़-धूप और भ्रम की संभावना कम हो जाती है।

पटना के सब-रजिस्ट्रार रवि रंजन के अनुसार, “ओटीपी आधारित अप्वाइंटमेंट अभी नई व्यवस्था है। लोग इसे समझने की प्रक्रिया में हैं। फरवरी-मार्च में वैसे भी रजिस्ट्री ज्यादा होती है। कुछ समय में लोग इस सुरक्षित और पारदर्शी सिस्टम के अभ्यस्त हो जाएंगे।”

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