एनएचएआई की टीम ने पांच अंचलों के 72 गांवों में सर्वे पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इसके बाद भागलपुर परियोजना कार्यान्वयन इकाई के परियोजना निदेशक ने इसे भूमि राशि पोर्टल पर अपलोड कर आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया है। अब अधिसूचना (3ए) का प्रकाशन जल्द किया जाएगा।
परियोजना का महत्व और लाभ
यह एक्सप्रेस-वे मुजफ्फरपुर को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा और नेपाल से लेकर बंगाल के हल्दिया बंदरगाह तक यात्रा को आसान बनाएगा। वर्तमान में मुजफ्फरपुर से बंगाल जाने में लगभग 15 घंटे लगते हैं, जबकि इस परियोजना के पूरा होने के बाद यह दूरी सिर्फ 8 घंटे में तय की जा सकेगी।
इस 650 किलोमीटर लंबी परियोजना का यह हिस्सा भारतमाला परियोजना के तहत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 60 मीटर चौड़ी यह सड़क एलाइनमेंट कारिडोर के अनुमोदन के बाद तेजी से बनायी जाएगी। इसके तहत राइट्स लिमिटेड तकनीकी और परामर्शदाता के रूप में परियोजना में सहयोग करेगा, जबकि डीपीआर तैयार करने का काम एनएचएआई के साथ मिलकर किया जाएगा।
भूमि अधिग्रहण और भुगतान प्रक्रिया
प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के लिए मीनापुर, औराई, बोचहां, गायघाट और बंदरा अंचलों के कुल 72 गांवों में भूमि अधिग्रहण किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अधिग्रहण पूरी तरह किसानों की सहमति से होगा। भूमि का बैनामा और मूल्य निर्धारण पारदर्शी तरीके से किया जाएगा, और मुआवजे की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।

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