भारत बनने जा रहा 'इकोनॉमी सुपरपावर', विश्व की नजरें टिकीं!

नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था अब वैश्विक मंच पर अपनी ताकत दिखाने के लिए तैयार है। मजबूत उपभोक्ता खर्च, सरकारी निवेश और नीति सुधारों का संयोजन इसे जल्द ही इकोनॉमी सुपरपावर की श्रेणी में लाने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही रणनीति और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी से भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक मानचित्र पर अपनी जगह और मजबूत करेगा।

S&P ग्लोबल रेटिंग्स के नवीनतम अनुमान के अनुसार आने वाले दो वित्तीय वर्षों में भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ 6.7% से 7% तक रहने की उम्मीद है, जो इसे वैश्विक स्तर पर आर्थिक शक्ति बनाने में मदद करेगी।

दो इंजन खींच रहे भारत की आर्थिक गाड़ी

भारत की तेजी की राह में दो सबसे ताकतवर कारक हैं:

उपभोक्ता खर्च में बढ़ोतरी: जीएसटी दरों में कटौती और इनकम टैक्स में राहत के चलते आम आदमी के पास खर्च करने के लिए अधिक पैसा है। इसका असर न केवल खुदरा बाजार में देखा जा रहा है, बल्कि यह उत्पादन और रोजगार को भी बढ़ावा दे रहा है।

सरकारी निवेश: देश को आर्थिक पावर बनाने के लिए सरकार सड़कों, रेलवे, और बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स पर रिकॉर्ड निवेश कर रही है। इसका लाभ रोजगार सृजन और व्यापार दोनों को हो रहा है। इसके अलावा, राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने और आरबीआई से मिलने वाले लाभांश के चलते सरकार अपने घाटे को नियंत्रित रख पा रही है, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत हो रहा है।

भारत की आर्थिक तस्वीर का संक्षिप्त चार्ट

आर्थिक संकेतक: अनुमान / लक्ष्य

GDP ग्रोथ (FY28): 7%

GDP ग्रोथ रेंज (FY27–FY28): 6.7% – 7%

राजकोषीय घाटा लक्ष्य (FY27): 4.3%

कुल पूंजीगत खर्च (Capital Outlay, FY27): GDP का 5.6%

विशेष पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure): GDP का 3.1%

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